Wednesday, September 28, 2022

राजस्थान की दो पंचायतों को राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान, पिंक सिटी से कम नहीं है यहां की सुविधाएं

जयपुर। पहले ओडीएफ और अब ओडीएफ प्लस..वैसे तो प्रदेश की कई ग्राम पंचायतों को ओडीएफ प्लस का खिताब मिल चुका है। लेकिन जयपुर जिले की जाहोता और जवानपुरा ग्राम पंचायत इस मामले में अग्रणी है। यहां की साफ-सफाई…कचरा निस्तारण प्रबंधन और लोगों के बीच इसे लेकर जागरूकता देखते ही बनती है। भारत सरकार द्वारा जवानपुरा को राष्ट्रीय स्तर पर हैल्थी विलेज घोषित किया गया है वहीं जाहोता हैरिटेज विलेज के रूप में भी अपनी पहचान बना रहा है।


जयपुर शहर से करीब 26 किमी. की दूरी पर स्थित जालसू ब्लॉक की ग्राम पंचायत जाहोता की साफ-सफाई और हैरिटैज स्वरूप को देखकर कोई भी हैरान रह जाएगा। यहां की राजकीय इमारतों पर आपको विशेष रंग और चित्रकारी देखने को मिलेगी। गांव की नर्सरी में तरह-तरह के पौधे तैयार किए जा रहे हैं…नालियों की साफ-सफाई के लिए गांव में 16 मैजिक पिट तैयार किए गए हैं। इस पिट में कचरा छानकर पानी को जमीन में छोडा जाता है, जो भूगर्भ जल स्तर बढ़ता है। साथ ही कंपोस्ट पिट का भी निर्माण किया गया है जहां पर बायोडिग्रेडेबल कचरे (फल और सब्जियों के छिलके, फूल, पत्तियां आदि) को निस्तारित किया जाता है, जो कुछ समय में कंपोस्ट में परिवर्तित हो जाता है। इसे किसानों को खेत में इस्तेमाल करने के लिए बेच दिया जाता है।


वहीं जयपुर शहर से करीब 80 किमी की दूरी पर स्थित विराटनगर पंचायत समिति की ग्राम पंचायत जवानपुरा में भी साफ-सफाई और कचरे के निस्तारण का दृश्य लगभग जाहोता जैसा ही है। जवानपुरा गांव में प्लास्टिक की बोतलें और डिब्बे आदि को छांट कर प्लास्टिक रीसाइक्लिंग फैक्ट्री को बेच दिया जाता है। जवानपुरा के सरपंच श्री जयराम पलसानिया ने बताया कि शुरुआत में इस अभियान को लेकर लोगों से ज्यादा सहयोग नहीं मिला, लोग प्लास्टिक को जला देते थे जिससे वायु प्रदूषण होता था। फल और सब्जियों के छिलके बाहर फेंक देते थे लेकिन अब उसे कंपोस्ट पिट में डाला जा रहा है। इसके लिए राजिविका के सहयोग से एक स्वयं सहायता समूह द्वारा कचरा संग्रहण किया जा रहा है। इसके लिए प्रत्येक घर से 10 रुपये लिए जाते हैं।


जाहोता गांव के सरपंच श्याम प्रताप सिंह राठौड़ ने बताया कि ग्राम पंचायत ठोस और तरल कचरा प्रबंधन पर पिछले 2 वर्ष से लगातार कार्य कर रही है और इस कार्य में आम जनता का भी सहयोग प्राप्त हो रहा है। यहां कचरा संग्रहण के लिए प्रत्येक घर से प्रति माह 120 रू लिए जाते हैं और 106 घर अभी इसमें सहयोग कर रहे हैं। उनका कहना है कि आने वाले दिनों में हर घर को कचरा संग्रहण से जोड़ कर सहयोग राशि 50 रू प्रति माह रखी जाएगी। 


जयपुर जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जसमीत सिंह संधु कहते हैं कि गांवों को खुले में शौचमुक्त यानि ओडीएफ कर लेने के बाद अब एक-कदम आगे स्वच्छता की ओर बढ़ाया गया है। इसके लिए जिला प्रशासन की ओर से ‘स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण’ के तहत ओडीएफ प्लस अभियान शुरू किया गया है। उन्होंने बताया कि स्वच्छता को प्रत्येक व्यक्ति की आदत में शामिल कराने के संकल्प के साथ अब ग्राम पंचायत को ओडीएफ प्लस बना दिया गया है। उन्होंने बताया कि अभी भी इसमें काफी चुनौतियां हैं जैसे लोगों को लगातार प्रोत्साहित करना और व्यक्तिग सोक पिट बनाना।


जयपुर जिला कलक्टर राजन विशाल ने बताया कि जयपुर जिले 606 ग्राम पंचायतों में से अभी मात्र 10 ओडीएफ प्लस घोषित किया गया है। उन्होंने बताया कि जाहोता और जवानपुरा ग्राम पंचायतों को मॉडल के रूप मे प्रदर्शित कर दूसरी ग्राम पंचायतों को भी ओडीएफ प्लस के लिए प्रेरित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि ओडीएफ प्लस के लिए तीन स्तर पर कार्य जरूरी है पहला व्यवहार में बदलाव दूसरा सीवरेज संरचना का निर्माण और तीसरा रेवन्यू मॉडल जिससे पंचायत आत्मनिर्भर बने और सरकार पर निर्भरता खत्म हो।


 ओडीएफ प्लस में शामिल होने के मानक-
• खुले में शौच पर पूर्ण पाबंदी.
• ग्राम पंचायत में कम से कम एक सामुदायिक शौचालय
• स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र एवं पंचायती घर में क्रियाशील शौचालय
• स्कूल-आंगनबाड़ी केंद्र पर बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय.
• सामूहिक स्थानों पर जैविक या अजैविक कूड़ा या नाले में पानी एकत्रित न हो.
• गांव में कूड़ा निस्तारण के लिए कूड़ेदान या गड्ढे
• सामुदायिक या व्यक्तिगत गोबर गड्ढे या बायोगैस प्लांट.
• गांव में प्लास्टिक कलेक्शन सेंटर बना हो.
• गांव में पांच मुख्य स्थानों पर स्वच्छता स्लोगन लिखे हों.

भले ही सरकारी प्रयासों से पहले ओडीएफ और फिर ओडीएफ प्लस के लिेए पहल हुई हो..लेकिन अब ये ग्रामवासियों की आदत में शुमार हो चुका है। इससे न केवल इन गांवों की सुंदरता बढी है बल्कि मौसमी बीमारियों का प्रकोप भी कम हुआ है।
ओडीएफ प्लस धीरे-धीरे प्रदेश की अन्य ग्राम पंचायतों तक भी पहुंचेगा इससे इन गांवों की स्वच्छता बेहतर होगी, वहीं ग्राम पंचायतों की आमदनी भी शुरू हो जाएगी। इसके तहत गांवों में कूड़ा निस्तारण का इंतजाम होगा, जहां जैविक और प्लास्टिक कूड़े को अलग-अलग किया जाएगा. इसमें जैविक कूड़े से खाद बनाई जाएगी, जबकि प्लास्टिक और अन्य पदार्थों को बेच दिया जाएगा। इससे मिलने वाले राशि भी गांव के विकास पर व्यय की जाएगी। 

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