Sunday, September 25, 2022

राजस्थान चुनाव 2023 ओवैसी की मुस्लिम वोट बैंक पर नजर, एआईएमआईएम की एंट्री बढ़ा सकती हैं कांग्रेस की मुश्किलें

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन साल 2023 में राजस्थान के चुनावी मैदान में उतरने का एलान कर चुकी है। एआईएमआईएम की राजस्थान में एंट्री कांग्रेस के लिए चुनौती साबित हो सकती है। वहीं भाजपा को इससे फायदा हो सकता है क्योंकि असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी कांग्रेस के अल्पसंख्यक वोट काट सकती है। वहीं ओवैसी मंगलवार शाम को अपनी प्रदेश कार्यकारिणी का एलान करेंगे। इससे पहले ही वो प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे।


राजस्थान में मुस्लिम आबादी करीब 10 प्रतिशत है लेकिन मतदाताओं के तौर पर यह समुदाय राज्य की कई सीटों पर प्रभाव रखता है। इनमें 15 सीटें मुस्लिम मतदाताओं के वर्चस्व वाली हैं। वहीं 20 से 25 सीटें ऐसी हैं, जहां बड़ा मुस्लिम वोट बैंक है। इनके वोट से चुनाव के नतीजों पर असर पड़ता है। राजस्थान में मुस्लिम आबादी लगभग 40 सीटें प्रभावित करती है। सीकर, झुंझुनूं, चूरू, जयपुर, अलवर, भरतपुर, नागौर, जैसलमेर और बाड़मेर जैसे कई विधानसभा क्षेत्रों में मुस्लिम विधायक निर्वाचित होते रहे हैं। कई इलाकों में मुस्लिम मतदाता हार-जीत तय करता है। इनमें से 16 सीटों पर मुस्लिम प्रत्याशी जीतते रहे हैं। 24 सीटों पर उनके फैसले ने जीत दिलाया है।

सूत्रों का कहना है कि असदुद्दीन ओवैसी जयपुर, टोंक, सवाई माधोपुर, धौलपुर, अलवर, सीकर, झुंझुनूं, नागौर, अजमेर चूरू, बीकानेर, जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर और करौली जिलों के वोट साधने की कोशिश करेंगी। ओवैसी की टीम राजस्थान के राजनीतिक हालात पर बारीकी से निगाह रखे हुए है।

यहां से ओवैसी उतार सकते हैं अपने प्रत्याशी

प्रदेश में मुस्लिम बाहुल्य विधानसभा क्षेत्रों की बात करें, तो आदर्श नगर, किशनपोल, हवामहल, टोंक, सवाई माधोपुर, धौलपुर, पुष्कर, मसूदा, अजमेर शहर, तिजारा, लक्ष्मणगढ़, रामगढ़, कामां, नगर, बीकानेर पूर्व, सरदार शहर, सूरसागर, शिव, पोकरण, मकराना, चूरू, फतेहपुर, धौलपुर, नागौर, मकराना, डीडवाना, मंडावा, नवलगढ़, नागौर, झंझुनू, सीकर और दातारामगढ़ जैसे विधानसभा क्षेत्र में ओवैसी अपने प्रत्याशी उतार सकते हैं।


असुद्दीन ओवैसी ने अपने दौरे के दौरान राजस्थान में संप्रदायिक दंगों को लेकर गहलोत सरकार पर जमकर निशाना साधा था। उन्होंने गहलोत सरकार को अल्पसंख्यक समुदाय के हित में काम करने की नसीहत तक दे डाली थी। माना जा रहा है कि ओवैसी चुनाव में सांप्रदायिक मामलों को हथियार बनाकर गहलोत सरकार के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरेंगे।

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