Monday, September 26, 2022

पद्मावत’ के बाद ‘पृथ्वीराज’ पर विवाद, राजस्थान में राजपूत-गुर्जर आमने-सामने, फिल्म रिलीज नहीं होने देने की चेतावनी

वर्ष 2017 में जयपुर में जब ‘पद्मावत’ फिल्म की शूटिंग हो रही थी तब राजपूत समाज ने इतिहास के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगाते हुए फिल्म निर्माता संजय लीला भंसाली के साथ मारपीट की थी। इसके बाद पूरे देश में विरोध प्रदर्शन, तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं हुई थी। अब फिल्म ‘पृथ्वीराज’ (film prithviraj) को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है। राजपूत (rajput) और गुर्जर (gurjar) समाज के लोग आमने-सामने है। राजपूतों के अनुसार सम्राट पृथ्वीराज चौहान एक राजपूत शासक थे। जबकि गुर्जर समाज का कहना है कि पृथ्वीराज चौहान गुर्जर शासक थे। दोनों ही समाज के प्रतिनिधि ने अपने-अपने तथ्य पेश कर रहे हैं।

अखिल भारतीय गुर्जर महासभा का यह दावा

अखिल भारतीय वीर गुर्जर महासभा के संरक्षक आचार्य वीरेंद्र विक्रम का कहना है कि कदवाहा और राजोर के शिलालेखों में, तिलक मंजरी, सरस्वती कंठाभरण, पृथ्वीराज विजय के शिलालेखों में पृथ्वीराज के गुर्जर होने के प्रमाण मिले हैं। वीरेंद्र विक्रम का दावा है कि पृथ्वीराज विजय महाकाव्य के सर्ग 10 के श्लोक नंबर 50 में पृथ्वीराज के किले को गुर्जर दुर्ग लिखा है। जबकि सर्ग 11 के श्लोक नंबर 7 और 9 में गुर्जरों द्वारा गौरी को पराजित करने का वर्णन है। इससे यह साबित होता है कि सम्राट पृथ्वीराज चौहान गुर्जर समाज से थे।

गुर्जर शब्द 325 साल पहले अस्तित्व में आया – लोकेन्द्र सिंह कालवी

राजपूत समाज के प्रतिनिधि लोकेंद्र सिंह कालवी का कहना है कि गुर्जर शब्द पहली बार 325 साल पहले ही अस्तित्व में आया है जबकि सम्राट पृथ्वीराज चौहान का जन्म 1149 ईस्वी में हुआ था। ऐसे में उन्हें गुर्जर जाति का बताना उचित नहीं है। कालवी ने कहा कि राजस्थान के वीर महापुरुषों को जातियों में बांटने की परंपरा दुर्भाग्यपूर्ण है।

महिपाल सिंह मकराना ने खुद को बताया पृथ्वीराज का वंशज

उधर करणी सेना के अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने कहा कि वे पृथ्वीराज चौहान के 34वीं पीढ़ी के सदस्य हैं। कुछ लोग यह नया तर्क लेकर आए हैं कि हम भी पहले गुजर थे। गुजरात्रा को गुर्जरों से जोड़ना या गुर्जर नरेश जैसी उपाधियों को गुर्जर जाति का नाम देना उचित नहीं है।

गुर्जर समाज के लोगों ने दी चेतावनी

अखिल भारतीय गुर्जर महासभा से जुड़े के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि अगर फिल्म में पृथ्वीराज चौहान को कहीं भी राजपूत बताया गया तो इसका विरोध किया जाएगा। देश में कहीं भी फिल्म को रिलीज नहीं होने दिया जाएगा। उधर राजपूत समाज ने फिल्म के टाइटल में ‘सम्राट’ शब्द जोड़ने की मांग उठाई है।

पृथ्वीराज चौहान महान थे, यह हम सभी को स्वीकार्य होना चाहिए- चंद्र प्रकाश द्विवेदी

फिल्म निर्माता डॉक्टर चंद्रप्रकाश द्विवेदी का कहना है कि पृथ्वीराज चौहान राजस्थान के वीर शासक थे। उनकी वीर कथा पिछले 40 वर्षों में बड़े पर्दे पर नहीं आई। इसीलिए जो इतिहास है उसे ही फ़िल्म के रूप में बड़े पर्दे पर दिखाया जाएगा। इतिहास से किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की गई है। हम सबको यह स्वीकारना चाहिए कि सम्राट पृथ्वीराज चौहान थे। जिस किसी के मन में संदेह है, वह फिल्म देख कर संतुष्ट हो जाएंगे।

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