Monday, September 26, 2022

अलवर मंदिर विवाद में भड़का आक्रोश : आज साधु-संतों और बीजेपी नेताओं ने आक्रोश रैली निकाली

राजस्थान के अलवर जिले में मंदिर तोड़ने को लेकर उपजा विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। जहां कांग्रेस- बीजेपी इस मामले में एक – दूसरे पर आरोप लगा रहे है। वहीं इसी बीच बुधवार को अलवर में हिंदूवादी संगठनों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यहां बीजेपी कार्यकर्ताओं और हिंदूवादी संगठनों ने आक्रोश रैली निकाली है।

22 अप्रैल को अलवर में 300 साल पुराने मंदिर पर बुलडोजर चलाए जाने के 5 दिन बाद हिंदू संगठनों और साधु-संतों ने बुधवार को आक्रोश रैली निकाली। आक्रोश रैली की अगुवाई कर रहे अलवर सांसद बालक नाथ ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से इस्तीफा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि हम राजस्थान सरकार को तुष्टीकरण की राजनीति करने से रोकने के लिए यह मार्च निकाल रहे हैं। जिन अधिकारियों ने मंदिर तोड़ा है, उन पर सख्त कार्रवाई की जाए और दोबारा मंदिर बनाया जाए।फिलहाल साधु-संतों और कलेक्टर शिवप्रसाद नकाते के बीच बातचीत का दौर चल रहा है। इसमें समाज के कई साधु, संत भी मौजूद हैं। वे अधिकारियों पर कार्रवाई को लेकर अड़े हुए हैं।

कंपनी बाग में एकत्रित हुए भाजपा कार्यकर्ता, साधु-संत

इस विरोध की शुरुआत कंपनी बाग के शहीद स्मारक से हुई। यहां जिले भर से आने वाले बीजेपी के कार्यकर्ता व आमजन बुधवार सुबह करीब 10 बजे इकट्‌ठा हुए। इसके बाद भाजपा नेताओं ने विरोध-प्रदर्शन किया। इससे पहले ही अलवर में पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड़ पर है।
सांसद बालकनाथ के साथ अन्य समाज के साधु-संतों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। वे बोले कि सरकार देवी-देवताओं का अपमान कर रही है।
गौरतलब है कि 300 साल पुराना मंदिर ढहाने के बाद विवाद बढ़ गया है। सड़क का रास्ता साफ करने के लिए अलवर में 86 दुकानें व घर बुलडोजर से तोड़े गए थे, इसी में 300 साल पुराना मंदिर भी था। एक दिन पहले ही गहलोत सरकार ने एसडीएम और नगर पालिका के ईओ समेत चेयरमैन को भी सस्पेंड कर दिया है।

तख्ता पलट करने तक संघर्ष चलेगा- बालक नाथ

सांसद बाबा बालकनाथ ने कहा कि यह मामला शांत नहीं होगा। गहलोत सरकार ने देवी देवताओं का उसी तरह अपमान किया है जैसे ढाई सौ साल पहले मुगलों ने सनातन धर्म का अपमान किया था। हिंदू समाज उसे भी नहीं भूला है और गहलोत सरकार के इस काम को भी याद रखेगा। गहलोत सरकार ने मुगलिया शासन की याद ताजा की है।

सरकार सीएम आवास से इफ्तार पार्टी का आयोजन करती है। जनता के पैसे से इस तरह के आयोजन न हों बल्कि सरकार सर्व समाज के हित के काम करे। ये मुद्दे चुनाव तक बने रहेंगे। हिंदू व संत समाज एकजुट है। सरकार का तख्ता पलट करने तक ये संघर्ष चलेगा।

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