Monday, September 26, 2022

छह अप्रैल 1980 को स्थापित बीजेपी ने 42 सालों का सफर पूरा कर लिया है , जानिए कैसे तय किया बीजेपी ने 2 सीट से 295 सीट तक का सफर

छह अप्रैल 1980 को स्थापित बीजेपी ने 42 सालों का सफर पूरा कर लिया है. ( बीजेपी स्थापना दिवस )
लंबे संघर्ष के बाद आज बीजेपी देश ही नहीं पूरे विश्व का सबसे बड़ा संगठन है। आज के दिन बीजेपी के दिग्गज नेता और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया । भारतीय जनता पार्टी अपने स्वर्णिम काल में स्थापना दिवस मना रही है ,जानिए अपने पहले चुनाव से BJP यहां तक कैसे पहुंची ?

सन 1980 में  लोकसभा चुनाव में जनता पार्टी को जनता ने नकार दिया। 1977 में 295 सीटें जीतने वाली जनता पार्टी 3 साल बाद महज 31 सीटों पर सिमट गई। हार का दोष पार्टी में शामिल उन लोगों पर मढ़ने की कोशिश की गई, जो जनसंघ से जुड़े हुए थे। 4 अप्रैल को दिल्ली में जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की एक अहम बैठक हुई। इसमें फैसला हुआ कि पूर्व जनसंघ के सदस्यों को पार्टी से निकाल दिया जाए। निष्कासित किए जाने वाले नेताओं में अटल और आडवाणी भी थे।इसके ठीक दो दिन बाद यानी 6 अप्रैल 1980 को दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में एक नए राजनीतिक दल की घोषणा हुई। इसका नाम था – भारतीय जनता पार्टी । आज इस ऐतिहासिक घटना को 42 साल पूरे हो चुके हैं।

बीजेपी अपने स्थापना के बाद शुरूआत के पहले दशक में कड़े संघर्ष के दौर से गुजरी। जनसंघ के दीपक चुनाव चिन्ह के बाद भारतीय जनता पार्टी को कमल का फूल चुनाव चिन्ह आवंटित हुआ। लेकिन कमल के फूल पर बीजेपी को चुनाव मैदान में उतरने का मौका 1984 में मिल सका। हालांकि, अपने पहले चुनाव में बीजेपी को कोई खास सफलता नहीं मिली। इसके महज दो सांसद ही जीतकर संसद में पहुंचे थे।

2014 के चुनाव में नरेंद्र मोदी के करिश्माई व्यक्तित्व के सहारे भाजपा 282 सीटें जीत लेती है और 543 सीटों वाली लोकसभा में एनडीए की संख्या 336 तक पहुंच गई। 26 मई 2014 को नरेंद्र मोदी देश के 15वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेते हैं। चुनाव में भाजपा का वोट प्रतिशत 31 प्रतिशत और अन्य सहयोगी दलों के साथ मिलकर यह 38 प्रतिशत रहा। खास बात यह थी कि पार्टी की स्थापना के बाद पहली बार भाजपा ने अपने दम पर संसद में स्पष्ट बहुमत हासिल किया।

अब हम आपको 5 बड़े मुद्दे बता रहे हैं, जिनके दम पर BJP यहां तक पहुंची है…

1. राम जन्मभूमि आंदोलन


1986 में लालकृष्ण आडवाणी को BJP का अध्यक्ष चुना गया। उस दौरान विश्व हिंदू परिषद अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए आंदोलन चला रही थी। BJP की राजनीति को यहीं से जमीन मिली। पार्टी ने इसका जमकर समर्थन किया। इसका असर ये हुआ कि 1984 में 2 सीटें जीतने वाली पार्टी 1989 में 85 सीटों पर पहुंच गई। सितंबर 1990 में आडवाणी ने अयोध्या में राम मंदिर के समर्थन में एक रथ यात्रा की शुरुआत की। 1992 में बाबरी मस्जिद ढहा दी गई। एक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद पर फैसला सुना दिया। फिलहाल, अयोध्या में मंदिर निर्माण हो रहा है।

2. कश्मीर मुद्दा


जनसंघ जो बाद में भाजपा बनी, उसके अग्रणी नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी जम्मू-कश्मीर को भारत का ‘अभिन्न अंग’ बनाने की वकालत करते थे। अगस्त 1952 में जम्मू में उन्होंने विशाल रैली की। कहा- या तो मैं आपको भारतीय संविधान दिलाउंगा या फिर इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए अपना जीवन बलिदान कर दूंगा। BJP इस मुद्दे को थामे रही। नरेंद्र मोदी ने दूसरी बार सत्ता संभाली तो 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर राज्य से संविधान का अनुच्छेद 370 हटाने का प्रस्ताव पास कराया गया। इसी के साथ BJP के मैनिफेस्टो का एक जरूरी वादा पूरा हुआ।

3. परिवारवाद की खिलाफत


BJP शुरुआत से ही परिवारवाद के खिलाफ रही है, लेकिन 2014 में नरेंद्र मोदी ने इसे जोर-शोर से उठाया। 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी ने परिवारवाद, जातिवाद, सांप्रदायिकता और मौकापरस्ती को लोकतंत्र के चार दुश्मन बताया। आज भी पार्टी में बड़े स्तर पर परिवारवाद या वंशवाद मौजूद नहीं है और खुलकर इसकी आलोचना होती है। हालांकि, छोटे स्तर पर इस नीति में फ्लेक्सिबिलिटी आई है।

4. गोहत्या की खिलाफत


BJP हिंदुत्व और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की फिलॉसफी से चलती है, इसलिए गाय और गोवंश का मुद्दा इसकी प्राथमिकता में रहता है। केंद्र से लेकर अलग-अलग राज्यों में BJP की सरकार बनने पर गोहत्या रोकने की कोशिश की गई है। अटल सरकार ने गो पशु आयोग बनाया। गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने गोहत्या पर पूरी तरह से रोक लगा दी। 26 मई 2017 को मोदी सरकार ने पशु बाजारों में हत्या के लिए मवेशियों की बिक्री और खरीद पर रोक लगा दी, लेकिन इसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।

5. भ्रष्टाचार


भारतीय जनता पार्टी ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2014 का लोकसभा चुनाव जिन मुद्दों पर लड़ा, उनमें भ्रष्टाचार एक प्रमुख मुद्दा था। UPA सरकार के दौरान हुए घोटालों और विदेशों में जमा कालेधन का मुद्दा जोर-शोर से उठाया गया। जनता ने भरोसा करते हुए BJP को जमकर वोट किया।पीएम नरेंद्र मोदी की लहर पांच साल बाद भी बरकरार रहती है। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा 303 सीटें जीतती है। भाजपा की ऐतिहासिक जीत में ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ नारा गूंजता रहा।यही नहीं कांग्रेस देश के विभिन्न राज्यों से सिमटती गई और बीजेपी एक-एककर राज्यों की सरकारें भी बनाती गई। आज 42 साल की इस यात्रा में बीजेपी सबसे ताकतवर राजनीतिक दल के रूप में उभर चुकी है। 

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