Saturday, October 1, 2022

 राजस्थान में बिना जांच चिकित्सकों के खिलाफ नहीं दर्ज हो सकेगा मुकदमा

राजस्थान सरकार के गृह विभाग ने चिकित्सकों व चिकित्साकर्मियों के लिए एसओजी (स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसीजर) जारी किया है। इसके तहत इलाज के दौरान मौत होने पर अब बिना जांच किए सीधा चिकित्सकों और चिकित्साकर्मियों पर मुकदमा दर्ज नहीं हो सकेगा। इलाज के लापरवाही से मौत पर मेडिकल बोर्ड बनेगा। इलाज में भारी लापरवाही पाए जाने पर ही उनके खिलाफ पुलिस मामला दर्ज कर सकेगी। आदेश में कहा गया है कि किसी भी चिकित्सक या चिकित्साकर्मी को बिना पुलिस अधीक्षक या पुलिस आयुक्त के निर्देश के गिरफ्तार नहीं किया जा सकेगा। गिरफ्तारी के आदेश तब ही दिए जाएंगे, जब पुलिस थाना अधिकारी लिखित राय में ऐसे चिकित्सकों या चिकित्साकर्मियों द्वारा जांच में मदद नहीं करने की बात कही गई हो। सबूत एकत्रित करने के लिए उसकी जरूरत हो या फिर वह मुकदमें से बचने के लिए तथ्य छुपा रहा हो।

इलाज में लापरवाही बरतने पर थाना अधिकारी दर्ज करेगा मामला 

इलाज में लापरवाही बरतने पर थाना अधिकारी मामला दर्ज करेगा। जांच के बाद न्यायालय में आरोप पत्र पेश करने से पहले तो केस भारतीय दंड संहिता की धारा 197 की श्रेणी में आते हैं, उनके बारे में सक्षम स्तर से अभियोजन की स्वीकृति ली जाएगी। सरकार ने उम्मीद जताई है कि चिकित्सक और चिकित्साकर्मी अपनी मांगे मनवानी के लिए हड़ताल का सहारा नहीं लेंगे। आदेश में कहा गया है कि कई बार इंटरनेट के जरिए आधी-अधूरी सूचना लेकर मरीज चिकित्सक के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करवा देते हैं। ऐसे हालात में चिकित्सक को मानसिक तौर पर प्रताड़ित होना पड़ता है। पुलिस इस विषय पर भी ध्यान रखेगी। आदेश में कहा गया है कि पुलिस को चिकित्सक की लापरवाही की शिकायत की प्राथमिक तोर पर जांच करनी होगी

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