Monday, September 26, 2022

कांग्रेस को अब पैसों की किल्लत, घर-घर जाकर दान मांगने की तैयारी में पार्टी

देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस (Congress) इस वक्त अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है. कांग्रेस पार्टी का हाल इतना बुरा है
कि वो जिसे छू लेती है, उसकी भी लुटिया डूब जाती है.

डूबती पार्टी छोड़कर उसके सिपाही नए आशियाने का रुख कर रहे • बिना नेताओं के चुनावी कसौटियों में पार्टी का दम निकल रहा है. अब पार्टी की सिर्फ छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) और राजस्थान (Rajasthan) में सरकार बची है, तो महाराष्ट्र, तमिलनाडु और झारखंड में वो सहयोगी है. सत्ता के बिना पार्टी की आर्थिक हालत भी खराब हो रही है. खबर है कि पार्टी बड़े स्तर पर फंड की कमी का सामना कर रही है. यह भी कहा जा रहा है कि पार्टी रुपयों की कमी को दूर करने के लिए घर-घर जाकर चंदा लेने की तैयारी कर रही है.

2 राज्यों और 55 सांसद तक सिमटी पार्टी

पार्टी का बुरा वक्त साल 2014 के बाद से शुरू हुआ, ये वही कालखंड है जब राहुल गांधी ने पार्टी की बागडोर संभाली. पिछले 8 साल में केंद्र से लेकर राज्यों में पार्टी का बुरा हाल हो गया. लोकसभा में पार्टी के पास आज सिर्फ 55 सांसद हैं. तो वहीं कांग्रेस की सरकार 19 राज्यों से सिमटकर 2 राज्यों में रह गई है. लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद राहुल गांधी ने अध्यक्षी छोड़ दी, जिसके बाद उनकी मां सोनिया गांधी को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया. पार्टी को अभी तक पूर्णकालिक अध्यक्ष नहीं मिल पाया है.

अंतर्कलह से लुप्त हो रही है कांग्रेस

कांग्रेस मुक्त भारत की राह में जो 2 राज्य पिलर के रूप में अभी तक खड़े हैं, वे हैं राजस्थान और छत्तीसगढ़, राजस्थान में सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच की नूराकुश्ती कई बार दिल्ली दरबार तक आ जाती है और पार्टी परेशान हो जाती है. इसी तरह पिछले साल से छत्तीसगढ़ में भी ऐसी ही नूराकुश्ती देखने को मिल रही है. वहां सीएम भूपेश बघेल और स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव के बीच कसमकश चल रही है.

आर्थिक संकट से जूझ रही कांग्रेस

करीब 60 साल तक देश की सत्ता पर काबिज कांग्रेस इस समय धन की कमी से जूझ रही है. पीएम मोदी के नेतृत्व में बीजेपी 2014 से कांग्रेस मुक्त अभियान चला रही है. भगवा पार्टी ने सबसे पहले कांग्रेस को देश की सत्ता से बाहर किया, फिर एक के बाद एक कई राज्यों में कमल खिला दिया. सत्ता की बिना कांग्रेस पार्टी को अपने खर्चे उठाना भारी पड़ रहा है. पार्टी की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि वो अपने कंधों पर अगला लोकसभा चुनाव भी नहीं लड़ सकती है. इसके लिए पार्टी ने घर-घर जाकर चंदा जुटाने का फैसला लिया है.

चिंतन शिविर में हुई इसपर चर्चा

उदयपुर में तीन दिवसीय चिंतन शिविर में भी इस मुद्दे को उठाया गया और इस संकट से बाहर निकलने के रास्ते खोजे गए. न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार चिंतन शिविर में केरल कांग्रेस के पूर्व प्रमुख रमेश चेन्नीथला ने इस मॉडल को अपनाने का प्रस्ताव रखा था. सूत्र के हवाले से बताया गया कि इस पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है. इसे किस तरह लागू किया जाएगा और फंड मैनेजमेंट और इसमें पार्दर्शिता जैसे कुछ मुद्दे हैं. इसपर विचार किया जा रहा है कि और टास्क फोर्स 2024 की बैठकों में चर्चा की जाएगी.

पार्टी की आय में जबरदस्त गिरावट

ECI में दाखिल ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार 2020-21 में कांग्रेस की आय 285.7 करोड़ रुपये थी. जबकि, इससे पहले वित्तीय वर्ष में यह आंकड़ा 682.2 करोड़ रुपये था. वित्तीय वर्ष 2018-19 में पार्टी की आय 918 करोड़ रुपये थी. रिपोर्ट के मुताबिक अहमद पटेल के निधन के बाद पार्टी पर आर्थिक मार ज्यादा पड़ी है. कांग्रेसियों का कहना है कि अहमद पटेल अपने कॉर्पोरेट और अन्य कॉन्टैक्ट्स की मदद से पार्टी फंडिंग का काम संभालते थे.

पार्टी पर क्यों आया आर्थिक संकट?

पार्टी पर आए इस आर्थिक संकट के लिए काफी हद तक पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी जिम्मेदार हैं. मोदी सरकार को घेरने के लिए राहुल गांधी अक्सर देश के उद्योगपतियों को गाली देते रहते हैं. • राहुल की इन हरकतों से उद्योग जगत के तमाम लोग उनसे नाराज हो गए और उन्होंने कांग्रेस को चंदा देना बंद कर दिया. एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2021 में कांग्रेस पार्टी की कुल आय 682.21 करोड़ रुपये रही और उसने 998.15 करोड़ रुपये खर्च किए. इस तरह से उसने अपनी आय से 46.31 प्रतिशत अधिक खर्च किया.

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