Wednesday, September 28, 2022

राजस्थान में राज्यसभा चुनाव से पहले दिल्ली पहुंचा विवाद, कांग्रेस में फिर मचा घमासान गहलोत सरकार के मंत्री, विधायकों में नाराजगी

कांग्रेस विधायकों और नेताओं ने अधिकारियों की मनमानी का मुद्दा एक बार फिर से नई बहस शुरू कर दी है। सरकार के नजदीक माने जाने वाले विधायक और नेता तक ब्यूरोक्रेसी के रवैये से नाराज है।

कई विधायक और नेता मुख्यमंत्री से लेकर प्रदेश प्रभारी अजय माकन से भी अफसरशाही के हावी होने की शिकायत कर चुके हैं।उधर, खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावासी ने नेताओं और जनप्रतिनिधियों की गरिमा की अवहेलना करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की वकालत की है ।

अब राज्यसभा चुनाव से पहले ये मामला फिर से गरमा गया है। प्रियंका गांधी के साथ ही यूपी में कांग्रेस प्रभारी सचिव धीरज गुर्जर भी नौकरशाही को घेर रहे हैं।


धीरज के समर्थन में सीएम के सलाहकार ने उठाए सवाल
सीएम अशोक गहलोत के सलाहकार संयम लोढ़ा ने दो दिन पहले गृह और राजस्व अधिकारियों के खिलाफ विशेषाधिकार उल्लंघन का प्रस्ताव रखा था। मुख्यमंत्री के सलाहकार नौकरशाही पर भी निशाना साध रहे हैं, जो दोनों विभागों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव कर रही है।विशेषाधिकार उल्लंघन नोटिस के अगले ही दिन धीरज गुर्जर संयम लोढ़ा के समर्थन में उतर आए। धीरज गुर्जर ने सरकार और पार्टी को

नौकरशाही के रवैये से आगाह किया।
बिधूड़ी ने कहा, ‘कर्मचारियों की नहीं सुन रहे अधिकारी’बेगूं से कांग्रेस विधायक राजेंद्र बिधूड़ी ने अफसरशाही के खिलाफ लंबे समय से मोर्चा खोल रखा है। बिधूड़ी सार्वजनिक रूप से अधिकारियों पर आरोप लगा रहे हैं। बिधूड़ी ने कहा, “कार्यकर्ताओं की बात नहीं सुनी जा रही है।” थाना कांग्रेस कार्यकर्ता की नहीं सुनता।विधायक के एसएचओ, कलेक्टर भी नहीं सुनते। जब कार्यकर्ता की आवाज नहीं सुनाई दे रही है तो आज चुनाव बूथ पर क्यों बैठें? चुनाव खत्म होने पर थाना और कलेक्टर को वापस बूथ पर बैठाएं। मेरे क्षेत्र में कई पुलिसकर्मी रात में पैसे लेकर अफीम तस्करों के वाहनों से गुजरते हुए तस्करों से मिल चुके हैं।

मंत्री ने कहा कि जनप्रतिनिधियों का सम्मान करना अधिकारियों का कर्तव्य है
नौकरशाही के रवैये से विधायकों की नाराजगी के सवाल पर खाचरियावास ने भास्कर से कहा- ”लोगों के प्रतिनिधियों की बात सुनना और उनका सम्मान करना हर अधिकारी-कर्मचारी का कर्तव्य है। ” यदि कोई अधिकारी जनप्रतिनिधियों की नहीं सुनता है। यदि कोई अच्छी जगह पोस्टिंग पर है तो उसका स्थान बदल देना चाहिए।

हंगामे के पीछे मजदूर वर्ग की मानसिकता भी है
आदिवासी इलाकों में कांग्रेस में हड़कंप के पीछे नौकरशाही की मनमानी का मुद्दा भी है। कांग्रेस विधायक गणेश खोखरा और रामलाल मीणा क्षेत्र के अधिकारियों पर आदिवासी विधायकों की बात नहीं मानने और सिर्फ एक नेता के निर्देश का पालन करने का आरोप लगा रहे हैं।

इसी बात को लेकर खोखरा धरने पर बैठ गए और फिर एसडीओ को बंधक बनाने का मामला सामने आया। खोखरा ने कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और प्रदेश प्रभारी अजय माकन से अधिकारियों की मनमानी की शिकायत की है।

मंत्रियों ने नौकरशाही को विधायकों के साथ घेरा
इससे पहले भी कई विधायक अधिकारियों के दबदबे के मुद्दे पर सरकार को घेर चुके हैं। कांग्रेस विधायक गिरिराज सिंह मलिंगा, जोगिंदर अवना, वाजिब अली, दिव्या मदेरणा ने अधिकारियों के दबदबे का मुद्दा उठाकर सरकार को घेर लिया है।गिरिराज सिंह मलिंगा ने डीजी पर दुश्मन होने का आरोप लगाया। एक बिजली कंपनी के इंजीनियर के अंग तोड़ने के विवाद में मलिंगा के जेल से रिहा होने के बाद हुई बैठक में सैन्य कल्याण राज्य मंत्री राजेंद्र गुडा ने बैठक की घेराबंदी की।

मुख्य सचिव द्वारा जारी सर्कुलर, नेताओं का सम्मान करें
मुख्य सचिव ने हाल ही में नेताओं की ओर से मनमानी के आरोपों को लेकर चल रहे विवाद को खत्म करने के लिए एक सर्कुलर भी जारी किया था। सर्कुलर में अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे विधायकों और जनप्रतिनिधियों का सम्मान करें और उनके प्रश्नों को सुनें। इस सर्कुलर के बावजूद स्थिति नहीं बदली और अधिकारियों के खिलाफ नेताओं की शिकायतें जस की तस बनी रहीं। अब यह राजनीतिक विवाद का विषय बन गया है।

आपकी राय

क्या मायावती का यूपी चुनावों में हार के लिए मुस्लिम वोटों को जिम्मेदार ठहराना सही है?

View Results

Loading ... Loading ...

Get in Touch

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Related Articles

Latest Posts