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Monday, September 26, 2022
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सिविल इंजीनियरिंग के बाद नहीं मिली नौकरी युवक ने गांव में शुरू किया डेयरी फार्म ,आज 10 से 12 लाख सालाना आय है

उत्तर प्रदेश का यह युवा हर किसी के लिए प्रेरणास्त्रोत है. सिविल इंजीनियर आशुतोष को पढ़ाई के बाद जब नौकरी नहीं मिली तो उन्होंने हाथ पर हाथ रखकर बैठने की बजाय अपना काम करने की ठानी और नंदिनी गौशाला की शुरूआत की

आजकल के युवा अपनी ज़िंदगी में सफलता पाने के लिए जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं क्योंकि एक सफल कैरियर की ख्वाइस हर किसी की होती है। आजकल सभी के लिए पढ़ाई पूरी करने के बाद भी नौकरी पाना बहुत बड़ी चुनौती बन गई है। ऐसे में युवा पीढ़ी व्यवसाय के तरफ कदम बढ़ा रहे हैं और नए-नए तरकीब भी अपना रहे हैं। इससे उन्हें अच्छा मुनाफा भी हो रहा और उनके जरिए अन्य कई लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। कुछ ऐसा ही हुआ आशुतोष दीक्षित (Ashutosh Dixit) के साथ, उन्हें पढ़ाई करने के बाद नौकरी नहीं मिली। वे अपनी बेरोजगारी दूर करने के लिए व्यवसाय करना शुरू किए और आज अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।

आशुतोष दीक्षित उत्तर प्रदेश (Utter Pradesh) के इटावा (Etawah) जनपद के बीहड़ी आसई गांव के रहने वाले हैं। उन्हें इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद भी नौकरी नहीं मिली। वह नौकरी के लिए पूरे एक साल तक प्रयास किए लेकिन बेरोजगारी ही उनके हाथ लगी। ऐसा सिर्फ आशुतोष के साथ ही नहीं है बल्कि हमारे देश में उनके जैसे अन्य भी कई युवा हैं जिन्हें उनकी योग्यता के अनुसार नौकरी नहीं मिलती है। क्योंकि भारत में बेरोजगारी बहुत बड़ी समस्या बन गई है। लेकिन आशुतोष भी हार नहीं माने और रोजगार के लिए व्यवसाय करने की योजना बनाएं।

लोन लेकर खरीदी 4 गायों से की शुरूआत

आशुतोष ने लोन लेकर राजस्थान के बीकानेर से चार शाहीवाल गाय खरीदीं और व्यवसाय की शुरूआत की. वह पढ़े-लिखे थे इसलिए बिजनेस की बारीकियां सीखने में समय नहीं लगा. चार गाय से शुरूआत करके, धीरे-धीरे अपना व्यवसाय बढ़ाया और 3 साल के अंदर आज 70 गायों की गौशाला के मालिक हैं.
वह सभी गायों की अच्छी देखभाल करते हैं और सैकड़ों लीटर गाय का दूध कांच की बोतलों में पैक करके शहर में सप्लाई करते हैं. इससे उन्हें दूध और घी का अच्छी भाव मिल रहा है. गायों को वह जंगल में ही चराते हैं जहां कई तरह की जड़ी-बूटी भी होती हैं. इससे उनकी गायों के दूध की क्वालिटी काफी अच्छी है.

गायों की सभी चीजें है बहुत फायदेमंद

आषुतोष दीक्षित (Ashutosh Dixit) गोबर से लकड़ी और खाद बनाकर भी उसे बेचने का काम करते हैं। गोबर का उपयोग इंधन के रूप में भी किया जाता है और इससे बनने वाले खाद का उपयोग भी खेतों में किया जाता है। गोबर से बनने वाले खाद का उपयोग करने से फसलों की पैदावार भी काफी बढ़ जाती है और वह फसल सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है।गोमूत्र का भी उपयोग औषधी के रूप में किया जाता है। गाय के दूध से दही, पनीर, बटर, घी के साथ ही अन्य भी कई चीजें बनाई जाती है, जो हमारे लिए फायदे का ही सौदा है। आशुतोष के अनुसार उनके यहां देशी घी सामान्य मूल्य से तीन गुणा ज्यादा रेट में बिकती है। क्योंकि बाजार में लगभग सभी चीजें मिलावट वाली ही है, इसीलिए देसी चीजों की डिमांड काफी ज्यादा है।

दूध की क्वालिटी ने बढ़ाई मांग

आशुतोष का कहना है कि इटावा जनपद के आसपास क्षेत्रों में गाय की यह प्रजाति नहीं पाई जाती है. शाहीवाल गाय राजस्थान और और हरियाणा में सबसे अधिक संख्या में हैं. एक गाय 10 से 12 लीटर प्रतिदिन दूध देती है. जिसे कांच की बोतलों में पैक करके 50 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से से बेचा जाता है.

साथ ही, लो फैट का दूध होने के कारण लोगों को इससे कोलेस्ट्रॉल की समस्या नही होती है. ब्लड प्रेशर एकदम मेन्टेन रहता है. इससे उन्हें एक माह में लगभग एक लाख से अधिक प्रॉफिट हो जाता है.

सालाना 15 लाख रुपए तक की कमाई

सामान्य तौर पर उनका देसी घी बाजार से 3 गुना रेट पर बिकता है. उनका व्यवसाय इतना बढ़ गया है कि सोशल मीडिया पर घी का ऑर्डर आता है. दूध भी बढ़िया क्वालिटी का होने के कारण जनपद के अधिकारी भी उनसे खरीद रहे हैं. गाय के गोबर से लकड़ी और खाद का निर्माण करके अच्छी कमाई कर रहे हैं.

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