Monday, September 26, 2022

ट्रेन में बेटिकट सफर कर रही अकेली महिला को नीचे नहीं उतार सकता टीटीई, जानिए क्या हैं रेलवे के नियम

अगर आप भी भारतीय रेल में सफर करते हैं तो आपको रेल के नियमों की जानकारी जरूर होनी चाहिए. अगर आपको रेलवे के नियमों के बारे में पता होगा तो रेलवे का कोई स्टाफ अधिकारी या आपका कोई सहयात्री आपके साथ गलत व्यवहार नहीं कर सकेगा. हम अपनी रेलवे की स्टोरी में आपको लगातार रेलवे के नए नियमों से अवगत करा रहे हैं.

रेल का एक नियम यह कहता है कि अगर कोई महिला रेल यात्री अकेले सफर कर रही है और उसके पास टिकट नहीं है तब भी टीटीई ट्रेन से उसे नीचे नहीं उतार सकता. भारत में रेलवे के लिए नियम कानून बनाने वाले रेल बोर्ड में तीन दशक पुराने इस कानून को सख्ती से लागू करने का फैसला किया है.

वास्तव में रेलवे (Indian Railways) के इस कानून के बारे में रेलवे के स्टाफ को भी पता नहीं है. रेलवे बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक अकेले सफर कर रही महिला यात्री को किसी भी स्टेशन पर उतार देने से अनहोनी की आशंका हो सकती है. अकेली महिला यात्रियों की सुरक्षा के हिसाब से साल 1989 में यह कानून बनाया गया था.

Indian Railways के मैनुअल के अनुसार अकेले सफर कर रही महिला यात्री के पास टिकट नहीं होने के बाद भी किसी स्टेशन पर नहीं उतारा जा सकता. इसके लिए टीटीई को जिला मुख्यालय के स्टेशन पर कंट्रोल रूम को सूचित करना होता है. यहां से उसे दूसरे ट्रेन में टिकट के साथ बिठाने की जिम्मेदारी जीआरपी के महिला कांस्टेबल की होती है.

भारतीय रेल (Indian Railways) ने महिला सशक्तिकरण के लिए पिछले कुछ सालों से काफी प्रयास किए हैं. इनमें महिला यात्रियों के लिए सुरक्षा, संरक्षा व सुविधा को बेहतर बनाना शामिल है. Indian Railways के रेलवे बोर्ड ने महिला सशक्तिकरण के लिए कई मोर्चे पर एक साथ काम करने का फैसला किया है.

इसमें अकेली महिला यात्री की सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने से लेकर कई उपाय किए जाने हैं. रेलवे बोर्ड ने कहा है कि आरक्षित कोच में प्रतीक्षा सूची में नाम होने पर भी अकेली महिला को ट्रेन से नहीं निकाला जा सकता है. यदि अकेली महिला स्लीपर क्लास के टिकट पर एसी कोच में सफर कर रही है तो टीटीई उससे स्लीपर कोच में जाने के लिए अनुरोध कर सकता है. अकेली महिला यात्री से ट्रेन में जोर जबरदस्ती नहीं की जा सकती.

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