Saturday, October 1, 2022

जयशंकर ने साझा किया खास वाकया, ‘पीएम मोदी ने कहा था कि आतंकवाद को न तो नजरअंदाज करेंगे और न ही बर्दाश्त’

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने विदेश नीति को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की है। “मोदी@20: ड्रीम्स मीट डिलीवरी” पुस्तक में एस जयशंकर ने लिखा है कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का साफ कहना है कि वह आतंकवाद, विशेष रूप से सीमा पार से प्रेरित आतंकवाद को न तो नजरअंदाज करेंगे और न ही बर्दाश्त करेंगे। उनके इस दृढ़ संकल्प ने 2014 के बाद से पाकिस्तान के प्रति भारत की नीति को नया आकार दिया है। 

“मोदी@20: ड्रीम्स मीट डिलीवरी” पुस्तक में लिखते हुए जयशंकर ने विदेश सचिव बनने के बाद 2015 में ‘सार्क यात्रा’ के लिए जाने के दौरान पीएम मोदी द्वारा दिए गए निर्देशों को याद किया है। उन्होंने लिखा कि पीएम ने मुझसे कहा कि उन्हें मेरे अनुभव और फैसले पर बहुत भरोसा है, लेकिन इस्लामाबाद पहुंचने पर मुझे एक बात ध्यान में रखनी चाहिए कि वह अपने पूर्ववर्तियों से अलग थे। वे आतंकवाद को न तो नजरअंदाज करेंगे और न ही बर्दाश्त करेंगे। 

जयशंकर ने इसमें चीन से जुड़े सीमा विवाद से निपटने में पीएम मोदी द्वारा अपेक्षित धैर्य के बारे में भी लिखा है। उन्होंने इसमें कहा है कि पीएम मोदी ने चीन के साथ सीमा विवाद सुलझाने के लिए अपेक्षित धैर्य का परिचय दिया है।

जयशंकर प्रसाद ने पुस्तक में लिखा है कि पीएम मोदी के अब तक के कार्यकाल में आतंकवाद के मुद्दे को वैश्विक स्तर पर उठाया गया है। आठ साल की मोदी सरकार आतंकवाद के मुद्दे को लेकर निष्पक्ष तरीके से वैश्विक बहस के केंद्र में लेकर आई। उन्होंने सीमा पर बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान केंद्रित किया है, क्योंकि प्रधानमंत्री जानते हैं कि हमारी सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना जरूरी है। ‘मोदी @20: ड्रीम्स मीट डिलीवरी’ में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने लिखा है पीएम मोदी के कार्यकाल में उचित विचार-विमर्श के बाद स्पष्ट रूप से लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं और उनके निष्पादन की जिम्मेदारी वाले लोगों को अपेक्षित स्थान दिया गया है। किताब में उन्होंने लिखा है कि 2014 के बाद से बजट दोगुने से अधिक हो गया है। सड़कों का निर्माण भी 2008-14 की तुलना में 2014-21 की अवधि में लगभग दोगुना हो गया है। 

इस किताब में विदेश मंत्री एस जयसंकर ने चीन के साथ सीमा बुनियादी ढांचे के अंतर को स्वीकार करते हुए लिखा कि उन्होंने अनुभव किया है कि 1988 के बाद से भारत से बहुत आगे निकल गया है। कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों में दूरी कम होना शुरू हो गया है और परिचालन तैनाती अधिक व्यवहारिक हो गई है।

किताब में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का व्यक्तिगत सम्मान भी है जो दूसरों के रवैये को प्रभावित करता है। मंत्री ने कहा कि उनके साथी उन्हें सर्वोत्कृष्ट भारतीय मानते हैं और उसी के अनुसार प्रतिक्रिया देते हैं। वे एक ऐसे व्यक्तित्व को परिभाषित करते हैं जिसे दुनिया पहचानने लगी है। उन्होंने लिखा कि मुझे याद है कि अमेरिकी नेता 2014 की यात्रा के दौरान उनके उपवास की आदतों के बारे में कितने मोहित थे। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने विश्व के नेताओं के साथ जो व्यक्तिगत संबंध बनाए हैं, उन्होंने सीधे तौर पर हमारे देश और लोगों के हितों को आगे बढ़ाया है।

यह पुस्तक पीएम मोदी के पिछले 20 वर्षों के राजनीतिक जीवन को दर्शाती है, जिसमें गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल से लेकर भारत के प्रधान मंत्री तक शामिल हैं और इसे उद्योग और राजनीति के प्रख्यात बुद्धिजीवियों और व्यक्तित्वों द्वारा संकलित किया गया है। पुस्तक में योगदान देने वालों में सुधा मूर्ति, सद्गुरु, नंदन नीलेकणी, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस जयशंकर, दिवंगत महान गायिका लता मंगेशकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, उद्योगपति उदय कोटक, अभिनेता अनुपम खेर, बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु और पीएम के पूर्व प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा शामिल हैं।

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