Saturday, October 1, 2022

Kota की मूक-बधिर शटलर गौरांशी ब्राजील डेफ ओलिंपिक में: पिता बनाना चाहते थे तैराक, लेकिन गौरांशी ने चुना बैडमिंटन

राजस्थान के रामगंजमंडी की 14 वर्षीय बेटी गैरांशी शर्मा जन्म से ही मूक-बधिर है, लेकिन मां-बाप की जिद ने बेटी को ऐसी ऊंचाईयों पर पहुंचा दिया है, जहां वह देश की शान बन गई है. गौरांशी 1 मई से ब्राजील में होने वाले बधिर ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। ब्राजील ओलंपिक में भारत से गौरांशी समेत सिर्फ 4 खिलाड़ियों का चयन हुआ है।
गौरांशी के माता-पिता भी जन्म से ही मूक-बधिर हैं। गौरांशी फिलहाल मध्य प्रदेश के भोपाल में रहती हैं और वहीं से उनका चयन भी हो चुका है। गौरांशी फिलहाल दिल्ली में स्पेशल ट्रेनिंग ले रही हैं। 27 अप्रैल को भारतीय टीम के साथ ब्राजील के लिए रवाना होंगे।

गौरांशी की दादी हेमलता शर्मा ने बताया कि गौरांशी जब दो साल की थीं, तब उनके ऊपर गर्म तेल गिरा था। उसका आधा शरीर जल चुका था। उनके शरीर पर 6 महीने तक पट्टियां बंधी रहीं, लेकिन उनके पिता गौरव शर्मा और मां प्रीति ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने संकल्प लिया था कि वह बेटी को इस मुकाम तक ले जाएंगे कि वह दूसरों के लिए मिसाल बने।

वे पहले उसे तैराक बनाना चाहते थे, लेकिन उसकी रुचि बैडमिंटन में थी। बैडमिंटन की विशेष कोचिंग के लिए उन्हें स्पोर्ट्स अकादमी में प्रवेश मिला। गौरांशी ने तीन साल पहले जून 2019 में डेफ बैडमिंटन विश्व चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। कोच रश्मि मालवीय और विष्णुवर्धन रेड्डी ने इस सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अभी दिल्ली में उनकी स्पेशल ट्रेनिंग चल रही है। भारतीय टीम 27 अप्रैल को ब्राजील के लिए रवाना होगी। टीम 12 मई को लौटेगी।

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