Saturday, October 1, 2022

ये हैं राजस्थान विधानसभा के मोस्ट इलेजिबल बैचलर, इनमें से कुछ तो अविवाहित रहने की ठान चुके हैं. 

बॉलीवुड और हॉलीवुड में मोस्ट इलेजिबल बैचलर की चर्चा कई बार आपने सुनी होगी, लेकिन राजस्थान में इस कैटेगिरी में फिल्मी सितारों की ज्यादा चर्चा नहीं होती. मोस्ट इलेजिबल बैचलर के मामले में राजस्थान में चर्चा होती है, तो वह राजनेताओं की ज्यादा होती है. मौजूदा विधानसभा को देखें तो इस बार पन्द्रहवीं विधानसभा में पांच ऐसे चेहरे हैं जो अविवाहित हैं. 

कौन हैं राजस्थान विधानसभा के पांच अविवाहित चेहरे?
राजस्थान की राजनीतिक के मोस्ट इलेजिबल बैचलर की लिस्ट में शामिल पांच चेहरों में दो महिला विधायक हैं, तो तीन पुरुष भी इस लिस्ट में शुमार हैं. इन पांच चेहरों में शामिल हैं, सिद्धी कुमारी, दिव्या मदेरणा, मुकेश भाकर, जगदीश चंद्रा और कैलाश मेघवाल

सिद्धि कुमारी
बीकानेर के पूर्व राजघराने की बेटी और बीकानेर पूर्व सीट से विधायक सिद्धि कुमारी का नाम सदन के मोस्ट इलेजिबल बैचलर्स की लिस्ट में पहले नंबर पर गिना जाता है. हालांकि बीते बजट सत्र में सिद्धी कुमारी दिखाई नहीं दी, लेकिन यह तीसरा मौका है, जब बीकानेर की जनता ने पूर्व महाराजा डॉ करणी सिंह की पोती और नरेन्द्र सिंह की पुत्री को बीकानेर पूर्व सीट से जितवाकर विधानसभा भेजा है. सिद्धि कुमारी 2008, 2013 के बाद 2018 के चुनाव में हर बार सीधे मुकाबले में लेकिन आराम से चुनाव जीती हैं. 


बॉलीवुड और हॉलीवुड में मोस्ट इलेजिबल बैचलर की चर्चा कई बार आपने सुनी होगी, लेकिन राजस्थान में इस कैटेगिरी में फिल्मी सितारों की ज्यादा चर्चा नहीं होती. मोस्ट इलेजिबल बैचलर के मामले में राजस्थान में चर्चा होती है, तो वह राजनेताओं की ज्यादा होती है. मौजूदा विधानसभा को देखें तो इस बार पन्द्रहवीं विधानसभा में पांच ऐसे चेहरे हैं जो अविवाहित हैं. 

दिव्या मदेरणा
पूर्व मंत्री महिपाल मदेरणा और पूर्व विधायक लीला मदेरणा की पुत्री दिव्या मदेरणा का नाम भी इस लिस्ट में है. अपने दादा और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष परसराम मदेरणा के समय से चली आ रही राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रीह दिव्या मदेरणा ने बीते बजट सत्र में अपनी भाषण शैली से सदन के सदस्यों के साथ ही जनता को भी प्रभावित किया है. अपनी बोल्डनेस के लिए खास पहचान रखने वाली दिव्या मदेरणा ने सदन में सरकार के मंत्री को रबर स्टांप तक बताकर अपने तेवर जाहिर किए. दिव्या मदेरणा के लिए इस बार विधानसभा के सदन में पहुंचने का पहला मौका है, वे जोधपुर के ओसियां से विधायक हैं. 

मुकेश भाकर
छात्र राजनीति से कांग्रेस के अग्रिम संगठनों और राजस्थान यूनिवर्सिटी में सक्रिय रहे मुकेश भाकर नागौर के लाडनूं से विधायक हैं. भाकर के लिए भी विधानसभा पहुंचने का यह पहला मौका है. विधानसभा में अपने सवालों के जरिये भाकर कोई बड़ा व्यापक प्रभाव नहीं छोड़ पाए हैं, लेकिन विधानसभा क्षेत्र में उनकी पकड़ मानी जाती है और लोग उनमें संभावनाएं देखते हैं. मोस्ट इलेजिबल बेचलर्स की पुरुष लिस्ट में भाकर सबसे ऊपर हैं. हालांकि पन्द्रहवीं विधानसभा में भाकर के साथ परबतसर के विधायक रामनिवास गावड़िया भी मोस्ट इलेजिबल बेचलर्स की लिस्ट में थे, लेकिन पिछले दिनों वे विवाह गठबंधन में बंधकर इस लिस्ट से बाहर हो चुके हैं. 

जगदीश चंद्र
श्रीगंगानगर की सादुलशहर विधानसभा सीट से विधायक जगदीश चंद्र वैसे तो उम्र के पांच दशक से ज्यादा पार कर चुके हैं, लेकिन अविवाहित होने के कारण इस लिस्ट में शामिल हैं. जगदीश चन्द्र लॉ ग्रेजुएट हैं और दिल्ली के सेंट स्टीफन्स कॉलेज से पढ़े हैं. युवावस्था से ही राजनीति में सक्रिय जगदीश चन्द्र की उम्र 60 वर्ष के करीब है. इस लिहाज से उनके शादी करने की संभावना नहीं दिखती, लेकिन पिछले दिनों बजट सत्र के दौरान एक विधायक ने कहा कि जब प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव अपनी नौकरी से रिटायरमेंट के बाद शादी कर सकते हैं, तो और कोई ऐसा क्यों नहीं कर सकता?

कैलाश मेघवाल 
राजस्थान की राजनीति के मोस्ट इलेजिबल बैचलर्स की लिस्ट में सबसे उम्र दराज नाम कैलाश मेघवाल का है. पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल संसद में भी राजस्थान के लोगों का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और विधानसभा में भी.  प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री कैलाश मेघवाल अपनी भाषण शैली और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता वाली बेबाक टिप्पणियों से कई बार दूसरों को चुप कर चुके हैं, लेकिन शादी के मामले में इनके प्रोफाइल का कॉलम अभी तक खाली ही है. उम्र के नौवें दशक में चल रहे मेघवाल 88 बरस के हो चुके हैं. 

हालांकि शादी करना या नहीं करना नितान्त व्यक्तिगत मामला है? और इन विधायकों के समर्थकों को इससे कोई मतलब नहीं है? कि उनके नेता ने शादी क्यों नहीं की? इन समर्थकों को तो इससे भी वास्ता नहीं है? कि उनका नेता शादी को लेकर क्या सोचता है? बहरहाल इन जनप्रतिनिधियों को लोग इनकी व्यक्तिगत खूबियों के कारण पसंद करते हैं, लेकिन विधानसभा में गाहे-बगाहे इन मोस्ट इलेजिबल बेचलर्स पर चर्चा हो ही जाती है. 

अशोक गेहलोत ने राजस्थान पुलिस मोबाइल इन्वेस्टिगेशन यूनिट वैन को दिखयी हरी झंडी, वैन के जरिए करेगी क्राइम पड़ताल करेगी पुलिस

आपकी राय

क्या मायावती का यूपी चुनावों में हार के लिए मुस्लिम वोटों को जिम्मेदार ठहराना सही है?

View Results

Loading ... Loading ...

Get in Touch

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Related Articles

Latest Posts