Wednesday, September 28, 2022

साइकिलिंग का रिकॉर्ड 30 हजार KM : तीन साल में 28 राज्य कवर किए, CM योगी भी फैन

37 साल के नरपत सिंह ने अपनी साइकिल के साथ एक खास मिशन पूरा किया है। ये मिशन है ग्रीन एनवायरनमेंट के लिए साइकिलिंग का विश्व रिकार्ड बनाने का। इसके लिए वे 3 साल 2 महीने और 23 दिन लगातार चलते रहे और करीब 30 हजार 120 किलोमीटर लंबा सफर साइकिल से तय किया।

नरपत ने राजस्थान में 7 हजार से अधिक पौधे लगाए। देश के सभी राज्यों से निकले नरपत का कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी स्वागत किया। नरपत ने कहीं रेलवे स्टेशन पर रातें गुजारी तो कहीं गुरुद्वारों, मंदिरों में प्रसाद खाकर दिन निकाले।

आइये जानते उनका अब तक का सफर

सवाल : आइडिया कब आया, शुरुआत के बारे में कुछ बताइए ?
जवाब : मैं हमेशा से ही एनवायरनमेंट के लिए कुछ करना चाहता था। मेरी यात्रा 27 जनवरी 2019 को शुरू हुई। स्टार्टिंग पॉइंट था जम्मू-कश्मीर। आज इस के समापन पर 3 साल 2 महीने 24 दिन हो चुके हैं। अब तक मैंने इस जर्नी में जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, दिल्ली, राजस्थान, गुजरात और यूपी के साथ 29 राज्यों को कवर कर लिया है। इस दौरान मैंने 93 हजार से ज्यादा पौधे लगाए। इसे एक लाख तक पहुंचाना है। इसलिए ये सफर लगातार जारी रहेगा।

सवाल : पूरे इंडिया में पौधे लगाने के पीछे क्या सोच है ?
जवाब : मैं राजस्थान तक सीमित नहीं रहना चाहता था। पूरे देश से बहुत प्यार करता हूं तो एनवायरमेंट प्रिजरवेशन का मैसेज भी पूरे देश को देना चाहता हूं। कोरोना के बाद तो ये और भी जरूरी हो गया था। मैंने अपनी यात्रा में ज्यादातर आबादी वाले रूट ही चुने। यहां रुक कर युवाओं को पर्यावरण को बचाने के लिए जागरूक किया। मेरा मानना है कि जिस व्यक्ति ने अपने जीवन में दो पौधे भी न लगाए हों, उसको मरने पर लकड़ी के साथ जलने का कोई हक नहीं है।

सवाल : जर्नी के चैलेंज क्या रहे?
जवाब : लद्दाख, कारगिल और कश्मीर में ज्यादा बर्फबारी होने से परमिशन नहीं मिली। पटनीटॉप से करनी चाही तो वहां 3 दिन बर्फबारी होती रही। फाइनली जम्मू एयरपोर्ट से साइकिल यात्रा शुरू हुई। कहीं तेज हवाओं, आंधियों और बारिश का सामना करना पड़ा। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, गोवा, तमिलनाडु, उड़ीसा में ऊंची और उबड़ खाबड़ सड़कों पर सफर तय करना पड़ा। घाटियों और पहाड़ों में पानी की दिक्कत, जंगली जानवरों का डर हमेशा रहता था। नैनीताल में 15 किलोमीटर की चढ़ाई में 17 घंटे लगे थे। कई जगह पर भूखा सोना पड़ा। कई जगहों पर रेलवे स्टेशन, मंदिर, गुरुद्वारों में रातें गुजारी। कभी-कभी पूरा दिन बारिश में भी साइकिल चलानी पड़ती थी। मुझे याद है जब मैं झालावाड़ में यात्रा पर था, कहीं भी एटीएम न मिलने पर बिस्किट खाकर काम चलाया था। पूरी यात्रा चैलेंज से भरी थी लेकिन इससे हिम्मत और बढ़ जाती है।

सवाल : यात्रा के सबसे यादगार किस्से ?
जवाब: मुझे याद है हिमाचल यूपी उत्तराखंड बॉर्डर पर साइकिल चलाते वक्त अचानक कालेसर अभयारण्य में पैंथर से सामना हुआ। वो जस्ट मेरे उपर से छलांग मारकर निकला। उस वक्त मेरी सांसे थम गई थी। मैंने अपनी साइकिल यात्रा के दौरान अब तक 170 हिरणों, 6 मोरों, 5 मोरनियों, 2 नीलगाय और 2 बाजों की जान बचाई है। इसके साथ-साथ दो शिकारियों को भी पकड़वाया। यही मेरे लिए इस यात्रा का सबसे यादगार हिस्सा रहा।

सवाल : लोगों से आपको इस जर्नी में कितना प्यार मिला?
जवाब: आज मैं जिस गांव में पहुंचता हूं वहां के लोग मेरा स्वागत करते हैं। लोगों ने तो मेरे काम की वजह से मेरा नाम ‘ग्रीन मैन’ रख दिया है। महाराष्ट्र में मेरी साइकिल के पीछे लगे तिरंगे को लेकर लोगों का अलग ही प्यार दिखा। मुझे देखकर लोगों ने खुद अपनी साइकिल पर तिरंगे लगा लिए थे।

सवाल : फैमिली का क्या सपोर्ट और रोल रहा?
जवाब: जब मैं इस मुहिम पर निकला था तो परिवार के सभी लोग बहुत खुश थे। सभी ने मेरा साथ दिया। मैंने तो छोटी बहन की शादी में ट्रैक्टर ट्रॉली में भरकर 251 पौधे दहेज में दिए थे। हाल ही में भतीजी हंसकर को 151 पौधे दहेज में दिए।
नरपत सिंह राजस्थान के बाड़मेर के लंगेरा गांव के रहने वाले हैं। उनकी उम्र 37 साल है। विश्व की सबसे लंबी साइकिल जर्नी पर निकले नरपत को आज लोग ‘ग्रीन मैन’ के नाम से जानने लगे हैं। पौधों को लगाने के साथ-साथ नरपत गर्मी वाले इलाकों में सूखे तालाबों में पानी भरवाने का भी काम करते हैं। उन्होंने अपनी साइकिल जर्नी में 20 से ज्यादा सूखे तालाबों को लोगों के मदद से जीवित किया है। आमजन को रक्तदान के प्रति जागरूकता करने के साथ साथ ग्रीन मैन ने 18 बार रक्तदान किया जिसमें से इस साइकिल यात्रा के दौरान 2 बार रक्तदान किया। 30 हजार 120 किमी की यात्रा के दौरान नरपत ने राजस्थान में 90 हजार से ज्यादा पौधे लगाए।

नरपत सिंह की इस मुहिम की तारीफ यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी कर चुके हैं। इसके अलावा उन्हें झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, कर्नाटक के पूर्व सीएम जगदीश शेट्टार और पुडुचेरी के पूर्व सीएम वी. नारायणसामी ने उन्हें सम्मानित किया है।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ नरपत सिंह।

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