Saturday, October 1, 2022

गुड टच-बैड टच केवल लड़कियों के साथ, बाल आयोग की ट्रेनिंग से मेल टीचर और स्टूडेंट दोनों ही गायब .

राजस्थान में बच्चियों से छेड़छाड़-दुष्कर्म की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। पिछले 3 साल में ही दुष्कर्म के 5793 केस दर्ज हुए हैं। इनमें बड़ी संख्या में मामले बच्चियों से जुड़े हैं। इसीलिए राज्य बाल आयोग जागरुकता बढ़ाने में जुटा है कि गुड टच-बैड टच क्या होता है। लेकिन इसकी ट्रेनिंग सिर्फ महिला शिक्षकों व बालिकाओं को दी जा रही है, पुरुष शिक्षकों व बालकों को नहीं।

ट्रेनिंग के जरिए महिला शिक्षकों व बालिकाओं को तो सतर्क किया जा रहा है लेकिन पुरुष शिक्षकों और लड़कों को यह संस्कार दिया ही नहीं जा रहा कि बच्चियों को छूते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। आयोग कई जिलों अब तक कुल 13,434 लोगों को प्रशिक्षण दे चुका है, लेकिन इनमें 12,109 बालिकाएं और 1295 महिला शिक्षक शामिल हैं, बालक एक भी नहीं। पुरुष शिक्षकों की संख्या भी केवल 30 है। बाल आयोग ने आपके द्वार कार्यक्रम के तहत इस प्रशिक्षण की शुरुआत 17 फरवरी 2021 से की थी।

3 विभाग, अलग-अलग योजनाएं…फोकस बालिकाओं पर

गुड टच और बेड टच की जानकारी देने के लिए शिक्षा विभाग और महिला बाल विकास विभाग की अलग-अलग योजनाएं संचालित हैं। दोनों का फोकस बालिकाओं व महिलाओं को प्रशिक्षण देने पर है। महिला बाल विकास विभाग भी ‘चुप्पी तोड़ो सयानी बनो’ अभियान चला रहा है। इसके तहत 16 मार्च को जयपुर जिला प्रशासन ने पंचायती राज संस्थान में 3 दिन कार्यशाला रखी उसमें भी जिले की 2300 महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया। अब ये भी अपने-अपने स्कूलों में बालिकाओं को ही जागरूक करेंगी।

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