Saturday, October 1, 2022

जसकौर के बयान पर भड़के किरोड़ी बोले, आरक्षित सीट से दे इस्तीफा, जाने क्या है पूरा मामला

दौसा से भारतीय जनता पार्टी की सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री जसकौर मीणा ने आरक्षण को लेकर अपना बयान सामने रखा है।
बीजेपी कार्यालय में हुई प्रेस कांफ्रेंस के दौरान संपन्न लोगों की तरफ से आरक्षण छोड़ने के सवाल पर जसकौर मीणा ने
कहा कि जो लोग सक्षम और संपन्न हो रहे हैं, वह आरक्षण का फायदा जरूर छोड़ेंगे। सांसद जसकौर मीणा ने खुद का
उदाहरण देते हुए कहा कि वह खुद भी आरक्षण छोड़ चुकी हैं।

जसकौर ने कहा कि वह ना कॉलेज में ज्यादा पढ़ी, ना स्कूल में बहुत ज्यादा पढ़ी, लेकिन नदी में जिस तरह पत्थर गुड़-गुड़
कर अच्छे आकार में आ जाता है, उसी तरह वह लगातार चलते- चलते सक्षम हुई हैं। जसकौर ने कहा कि समाज में सभी
को इस बात का ध्यान देना चाहिए कि अगर आप सक्षम हैं तो कम से कम 5 बच्चों की पढ़ाई का खर्चा आपको उठाना
चाहिए।
इसके बाद सांसद ने कहा कि मौजूदा समय में भी वह 158 बच्चियों की स्कूल फीस, किताबों और दूसरा जरूरी खर्चा उठा
रही हैं. उन्होंनेन्हों कहा कि हो सकता है अगले साल इस संख्या में और ज्यादा बढ़ोतरी हो जाए. दौसा की एसटी सुरक्षित सीट
से सांसद जसकौर ने कहा कि वे और उनकी पार्टी, ‘ सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास’ में भरोसा रखती हैं,
लेकिन यह तभी संभव होगा जब ‘सबका प्रयास’ इसमें होगा।

आरक्षित सीट से दें इस्तीफा

आरक्षण को लेकर जसकौर मीणा के बयान पर किरोडी लाल मीणा की तल्ख प्रतिक्रिया आई है। जाकौर पर भड़कते हुए
किरोड़ी ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या वाकई दौसा सांसद सक्षम हो गई हैं? अगर वह आरक्षण का फायदा नहीं ले रही
तो दौसा आरक्षित सीट से चुनाव क्यों लड़ा? इसके साथ ही किरोड़ी ने जसकौर को नसीहत देते हुए कहा कि दौसा
आरक्षित सीट से जसकौर मीणा इस्तीफा दें।

आरक्षण क्यों दिया जाता है

भारत में सरकारी सेवाओं और संस्थानों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं रखने वाले पिछड़े समुदायों तथा अनुसूचित जातियों और जनजातियों के सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए भारत सरकार ने सरकारी तथा सार्वजनिक क्षेत्रों की इकाइयों और धार्मिक/भाषाई अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थानों को छोड़कर सभी सार्वजनिक तथा निजी शैक्षिक संस्थानों में पदों तथा सीटों के प्रतिशत को आरक्षित करने के लिए कोटा प्रणाली लागू की है। भारत के संसद में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के प्रतिनिधित्व के लिए भी आरक्षण नीति को विस्तारित किया गया है। read also- दुर्गापुरा में CM और कांग्रेस नेताओं ने आजादी गौरव यात्रा का किया स्वागत,BJP और RSS को बनाया निशाना बोले: धर्म जाति के नाम पर भड़काकर लगाई आग

आरक्षण की वर्तमान स्थिति

वर्तमान में भारत की केंद्र सरकार ने उच्च शिक्षा में 49.5फीसदी आरक्षण दे रखा है और विभिन्न राज्य आरक्षणों में वृद्धि के लिए अनुच्छेद-16(4) के आधार पर  क़ानून बना सकते हैं। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार 50फीसदी से अधिक आरक्षण नहीं दिया जा सकता है, लेकिन राजस्थान और तमिलनाडु जैसे कुछ राज्यों ने क्रमशः 68 फीसदी और 87फीसदी तक आरक्षण का प्रस्ताव रखा है, जिसमें अगड़ी जातियों के लिए 14 फीसदी आरक्षण भी शामिल है। read also-  इन तीन राज्यों में भीषण गर्मी के बीच गहरा सकता है बिजली का संकट, ऊर्जा मंत्री ने की हाई लेवल बैठक

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