Saturday, October 1, 2022

किरोड़ीलाल मीणा और विश्वेंद्र सिंह दौसा के बिच गहरे हुए संबंध, चुनाव से पहले पूर्वी राजस्थान में बन सकते है नए समीकरण

राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 से पहले पूर्वी राजस्थान के दो दिग्गज नेताओं की लगातार बढ़ती दोस्ती सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है. बीजेपी सांसद किरोड़ीलाल मीणा राजस्थान सरकार में पर्यटन मंत्री और पायलट समर्थक मंत्री विश्वेंद्र सिंह से पिछले 2 महीने में 6 बार मुलाकात कर चुके हैं.दोनों नेताओं की बढ़ती दोस्ती के अब राजनीतिक मायने निकाले जाने लगे हैं. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि दोनों नेताओं की दोस्ती चुनावों से पहले पूर्वी राजस्थान में नए समीकरण बना सकती है. किरोड़ीलाल मीणा जनता के लिए आंदोलन करने और गहलोत सरकार को घेरने में मुखर है लेकिन पार्टी की राजस्थान इकाई में वह काफी समय से हाशिए पर चल रहे हैं ऐसे में किरोड़ी की विश्वेंद्र सिंह से मुलाकात पूर्वी राजस्थान में कांग्रेस एवं बीजेपी के समीकरण बिगाड़ सकती है. हालांकि, किरोड़ी समर्थकों ने किसी भी तरह के सियासी चर्चा को हवा देने से इंकार किया है.

सांसद और मंत्री की गहरी होती दोस्ती

बीजेपी सांसद किरोड़ी लाल महीने में दो या तीन बार पर्यटन मंत्री से मुलाकात रहे हैं, हालांकि सांसद की तरफ से कहा गया है कि विश्वेंद्र सिंह दौसा जिले के प्रभारी मंत्री है ऐसे में जनता की समस्याओं के समाधान के लिए उनसे मिलना होता है. वहीं दूसरी तरफ हाल में सांसद किरोड़ी लाल मीणा को मंत्री के घर के बाहर पुलिस के रोके जाने के बाद खुद विश्वेंद्र सिंह उन्हें बाहर तक लेने आए और पुलिस को फटकार लगाई. मंत्री ने सांसद किरोड़ी की खुलकर तारीफ भी की.

2013 में बिगाड़ा था किरोड़ी ने खेल

मालूम हो कि 2008 में किरोड़ी लाल बीजेपी छोड़ने के बाद नेशनल पीपुल्स पार्टी में चले गए थे जहां 2013 में चुनाव लड़कर पूर्वी राजस्थान में बीजेपी और कांग्रेस को असुरक्षित कर दिया था. उस दौरान एनपीपी के 4 विधायक जीते थे और 12 से अधिक प्रत्यशी दूसरे नंबर पर रहे थे. इसके बाद 2018 में किरोड़ी फिर से बीजेपी में चले गए.बीजेपी में लौटने के बाद किरोड़ी को आलाकमान से बड़ी उम्मीद थी लेकिन पार्टी ने उन्हें सिर्फ राज्यसभा सदस्य बनाया. ऐसे में अब कयास लगाए जा रहे हैं कि किरोड़ी 2023 के विधानसभा चुनावों से पहले आलाकमान पर दबाव डालने के लिए कुछ कदम उठा सकते हैं.गौरतलब है कि 2018 के विधानसभा चुनाव में पूर्वी राजस्थान से कांग्रेस को 58 सीटों में से 40 सीटों पर जीत हासिल हुई थी. कांग्रेस अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाईमाधोपुर, दौसा और जयपुर जैसी सीटों पर एकतरफा जीती थी. हालांकि इस बार भी कांग्रेस और बीजेपी दोनों की नजरें पूर्वी राजस्थान पर टिकी हुई है.

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