Saturday, October 1, 2022

फोटोग्राफी और रिसेप्शन भी, भीलवाड़ा पुलिस को दो दिन तक भनक नहीं : 10 नाबालिग जोड़ों का धूमधाम से हुआ बाल-विवाह

राजस्थान बाल-विवाह जैसी कुप्रथाओं में अब तक जकड़ा हुआ है। सरकार की ओर से बाल-विवाह रोकने के लिए बनाए गए कानून और तमाम जागरूकता अभियानों के बाद भी प्रदेश के 16 जिलों में अब भी सर्वाधिक बाल-विवाह हो रहे हैं। इनमें भीलवाड़ा जिला टॉप पर है।

यहां दो दिन पहले भी 10 नाबालिगों का विवाह पूरे धूमाधाम से किया गया। तीन दिन तक फंक्शन हुए सभी रस्में निभाई गईं। नाबालिग दुल्हा-दुल्हन ने हजारों लोगों की मौजूदगी में स्टेज पर वरमाला पहनाई और उनका फोटोशूट भी हुआ, लेकिन पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी।मामला भीलवाड़ा के मांडल कस्बे है। यहां बुधवार रात अलग-अलग 10 नाबालिग जोड़ों की शादी हुई। जानकारी के अनुसार लांगरों का खेड़ा गांव में अलग-अलग स्थानों से करीब 17 बारातें आईं थी। इनमें नाबालिग दुल्हे भी शामिल थे, जिनकी की गांव में बिंदोली भी निकाली गई। बाल-विवाह में हजारों लोगों के लिए रिसेप्शन का भी आयोजन किया गया। पुलिस पर आरोप है कि इसी दिन एक एनजीओ कार्यकर्ता ने बाल विवाह की सूचन पुलिस को दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

बारात विदा होने के बाद एफआईआर

मांडल थाना प्रभारी मुकेश कुमार वर्मा ने बताया कि बाल कल्याण समिति की की और से गुरुवार शाम को लांगरों का खेड़ा में 19 अप्रैल को नाबालिग जोड़ों के विवाह करवाने का मामला दर्ज करवाया गया है। पुलिस ने इस संबंध में जांच कर ही है। साथ ही इस शादी में पंडित, फोटोग्राफर व अन्य कार्य करने वाले कौन कौन से इसके बारे में भी पूछताछ की जा रही है।

​​​गुरुवार को बाल विवाह की शिकायत मिलने पर बाल कल्याण समिति और चाइल्ड लाइन ने के सदस्यों की टीम गांव में पहुंचीं थी। जानकारी जुटाने और बाल-विवाह की पुष्टि होने के बाद मांडल थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई गई। बताया जा रहा है कि 23 अप्रैल को भी गांव में दो बाल विवाह होने हैं, लेकिन पुलिस ने अब रुकवा दिया और परिजनों को पाबंद किया है।

सबसे ज्यादा बाल विवाह राजस्थान में


यूनिसेफ के बीते कुछ सालों के आंकड़ों के अनुसार भारत में सबसे अधिक बाल विवाह राजस्थान, बिहार और पश्चिम बंगाल में होते हैं। विशेषकर राजस्थान के 16 जिले इस मामले में सबसे ज्यादा बदनाम है। इन जिलों में दौसा, जोधपुर, भीलवाड़ा, चूरू, झालावाड़, टोंक, उदयपुर, करौली, अजमेर, बूंदी, चितौडगढ़, मेड़ता-नागौर, पाली, सवाईमाधोपुर, अलवर व बारां शामिल हैं।

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