Wednesday, September 28, 2022

Rajasthan: संध्या यादव पर अभद्र टिप्पणी करने के आरोप में वकील गोवर्धन सिंह गिरफ्तार, जाने क्या है पूरा मामला

राजस्थान हाई कोर्ट के वकील और आरटीआई एक्टिविस्ट गोवर्धन सिंह (advocate goverdhan singh) को जयपुर की सदर पुलिस (jaipur police) ने गिरफ्तार कर लिया है। जानकारी के मुताबिक दो साल पहले एक महिला पुलिस अफसर संध्या यादव (sandhya yadav) के खिलाफ अभद्र और जातिगत टिप्पणियां करने के आरोप में पुलिस ने एडवोकेट गोवर्धन सिंह को गिरफ्तार किया है। इससे पहले गोवर्धन सिंह की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट (High court) ने रोक लगा दी थी। बुधवार 27 अप्रैल को हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी से रोक हटा ली। जिसके तुरंत बाद जयपुर पुलिस ने हाई कोर्ट के मेन गेट से एडवोकेट गोवर्धन सिंह को गिरफ्तार कर लिया और उसे सदर थाने ले जाया गया।

क्या है पूरा मामला

बता दें कि गोवर्धन सिंह की गिरफ्तारी के बाद एडिशनल पुलिस कमिश्नर अजय पाल लांबा ने प्रेस वार्ता की। उन्होंने बताया कि 3 अप्रैल 202 को लॉकडाउन के दौरान एडवोकेट गोवर्धन सिंह की गाड़ी को खासा कोठी सर्किल के पास तत्कालीन एसीपी सदर डॉ. संध्या यादव द्वारा रोका गया। लॉकडाउन के दौरान बिना अनुमति के गाड़ी में लेकर घूमने पर प्रतिबंध था। इस दौरान वकील गोवर्धन सिंह एसीपी डॉ. संध्या यादव से उलझ गया। इसके बाद संध्या यादव ने सदर थाने में एडवोकेट गोवर्धन सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। महिला अफसर संध्या यादव ने आरोप लगाया कि एडवोकेट गोवर्धन सिंह ने उन्हें आपत्तिजनक तरीके से देखते हुए अभद्र भाषा का प्रयोग किया। साथ ही देख लेने की धमकी दी। डॉ. संध्या यादव ने यह भी आरोप लगाया कि एडवोकेट गोवर्धन सिंह ने सोशल मीडिया के फेसबुक पेज पर महिला गरिमा के विरुद्ध आपत्तिजनक एवं व्यक्तिगत टिप्पणियां करते हुए अभद्र भाषा का प्रयोग किया। अलग-अलग दिन सोशल मीडिया पर ऐसी आपत्तिजनक पोस्टें वायरल की।

4 अफसरों ने की मामले की जांच

महिला पुलिस अफसर डॉ संध्या यादव के मुकदमा दर्ज कराए जाने के बाद चार अलग-अलग पुलिस अफसरों ने इस मामले की जांच की। सबसे पहले एसीपी प्रमोद स्वामी ने इस मामले की जांच की, जिसमें आरोपी गोवर्धन सिंह को दोषी पाया गया। इसके बाद इसकी जांच क्राइम ब्रांच की एडिशनल एसपी सरिता बडगूजर को दी गई। उन्होंने भी अपनी जांच में एडवोकेट गोवर्धन सिंह को दोषी माना। इन दोनों जांचों को गलत बताते हुए गोवर्धन सिंह ने पुलिस मुख्यालय में अपील करके अन्य अधिकारी से जांच कराने की मांग की, तो इस प्रकरण की जांच एडिशनल एसपी अशोक चौहान को दी गई। अशोक चौहान ने भी प्रमोद स्वामी और सरिता बडगूजर की जांच रिपोर्ट को सही मानते हुए गोवर्धन सिंह को आरोपी माना। बाद में एडिशनल एसपी करण शर्मा से इस मामले की जांच करवाई गई। उन्होंने भी गोवर्धन सिंह को दोषी माना। चार वरिष्ठ अफसरों द्वारा जांच में दोषी पाए जाने पर गिरफ्तारी के डर से एडवोकेट गोवर्धन सिंह ने हाईकोर्ट में अपील की जिस पर हाईकोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। 27 अप्रैल बुधवार को जैसे ही गिरफ्तारी से रोक हटी तो पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

जयपुर में होगा उग्र आंदोलन

बता दें कि बुधवार दोपहर को हाईकोर्ट के बाहर से जैसे ही पुलिस ने एडवोकेट गोवर्धन सिंह को गिरफ्तार करके सदर पुलिस थाने पहुंची तो वकील की भीड़ पुलिस थाने पहुंच गई। जानकारी के अनुसार वकीलों ने काफी देर तक इस गिरफ्तारी को गलत ठहराते हुए पुलिस पर कई तरह के आरोप लगाए। उनका कहना था कि बिना जुर्म प्रमाणित हुए और बिना हाईकोर्ट के आदेश के पुलिस ने एडवोकेट गोवर्धन सिंह को गिरफ्तार किया है। अगर उन्हें वापस नहीं छोड़ा गया तो वकील जयपुर में उग्र आंदोलन करेंगे। वकीलों के जमावड़े को देखते हुए पुलिस का भारी जाब्ता भी सदर थाने पर तैनात किया गया।

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