Wednesday, September 28, 2022

राजस्थान राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस विधायकों के बदले सुर ! आखिर क्यों निशाने पर गेहलोत सरकार में ब्यूरोक्रेसी 

राजस्थान में राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के आधा दर्जन विधायकों के सुर बदलते जा रहे हैं। ये विधायक ब्यूरोक्रेसी की आड़ में सीएम गहलोत को निशाने पर ले रहे हैं। राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के विधायकों की नाराजगी पार्टी पर भारी पड़ सकती है। राजस्थान में राज्यसभा की 4 सीटें है। इनमें से 2 सीटों पर कांग्रेस और एक सीट पर बीजेपी की जीत तय है। जबकि तीसरी सीट के लिए कांग्रेस को निर्दलीय विधायकों की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में कांग्रेस के नाराज विधायक रणनीति के तहत बयान देकर गहलोत पर अपनी मांगें मनवाने के लिए दबाव बना रहे हैं। डूंगरपुर विधायक गणेश घोघरा, राजेंद्र बिधूड़ी, भरत सिंह, रामलाल मीना, मंत्री रमेश मीना, पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह और एआईसीसी सचिन धीरज गुर्जर लगातार ब्यूरोक्रेसी पर निशाना साधकर गहलोत सरकार की परेशानी बढ़ाने वाले बयान दे रहे हैं। 

सीएम गहलोत पर दबाव बनाने की रणनीति

जानकारों का कहना है कि राज्यसभा चुनाव से पहले इन विधायकों को सुर में आए बदलाव की वजह को सीधे तौर पर सीएम गहलोत पर दबाव बनाने के तौर पद देखा जा रहा है। बुधवार को ही बेंगू विधायक राजेंद्र बिधूड़ी ने अफसरों पर निशाना साधते हुए सीएम गहलोत पर रीट पेपर लीक मामले में अपने करीबी मंत्री को बचाने का आरोप लगा दिया। माना जा रहा है कि राजेंद्र बिधूड़ी ने रणनीति के तहत गहलोत पर निशाना साधा है। देवा गुर्जर हत्याकांड में राजेंद्र बिधूड़ी पर आरोप लगे हैं। इसलिए राजेंद्र बिधूड़ी ने जानबूझकर गहलोत पर दबाव बनाने के लिए बयान दिया है। डूंगरपुर विधायक एवं यूथ कांग्रेस अध्यक्ष गणेश घोघरा ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। गणेश घोघरा के इस्तीफे को सरकार पर दबाव के तौर पर देखा जा रहा है। चर्चा है कि डूंगरपुर कांग्रेस जिला अध्यक्ष दिनेश खोड़निया को पार्टी राज्यसभा का उम्मीदवार बना सकती है। दिनेश खोड़निया सीएम गहलोत के करीबी माने जाते हैं। आदिवासी विधायकों ने दिनेश खोड़निया के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। गणेश घोघरा और अन्य आदिवासी विधायकों का कहना है कि गैर आदिवासी को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाने का विरोध किया जाएगा।

गहलोत के मंत्री पर साध चुके हैं ब्यूरोक्रेसी पर निशाना

सांगाोद से कांग्रेस विधायक एवं पूर्व मंत्री भरत सिंह लगातर ब्यूरोक्रेसी पर निशाना साधते रहे  हैं। भरत सिंह भ्रष्ट अधिकारियों को हटाने के लिए कई बार सीएम गहलोत को पत्र भी लिख चुके हैं। हाल ही में भरत सिंह ने गोपालन मंत्री प्रमोद जैन भाया पर भ्रष्ट होने का आरोप लगाया था। भरत सिंह तो विधानसभा के बजट सत्र में भी शामिल नहीं हुए थे। पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह भरतपुर के अधिकारियों के कामकाज से नाखुश बताए जा रहे हैं। विश्वेंद्र सिंह अपने ही विभाग के बड़े अधिकारियों पर निशाना साध चुके हैं। पंचायतीराज मंत्री रमेश मीना करौली पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा चुके हैं। कुछ दिनों पहले करौली में हुए हत्याकांड पर रमेश मीना ने पुलिस प्रशासन के प्रति खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। एआईसीसी सचिव धीरज गुर्जर ने बुधवार को कहा कि अफसर विपक्ष के साथ मिलकर सरकार की कब्र खोदने का काम करते हैं। समय पर इनकी पहचान नहीं करने पर किसी भी सरकार को इनके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं। 

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