Sunday, September 25, 2022

राज्यसभा चुनाव : राजस्थान से किन नए चेहरों की खुलेगी किस्मत, युवा और बुजुर्ग नेताओं की उधेड़बुन में फंसी कांग्रेस !

राजस्थान में राज्यसभा चुनाव की 4 सीटों के लिए नामांकन चल रहे है, आज पर्चा दाखिल करने का दूसरा दिन है लेकिन कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही पार्टियों में प्रतयाशियों के नामों पर भारी खींचतान चल रही है.

राज्यसभा (rajyasabha election) के लिए आलाकमान जहां राजनीतिक समीकरण साधने में लगा हुआ है वहीं स्थानीय नेता अपनी दावेदारी पेश करना चाहते हैं ऐसे में उम्मीदवारों का चयन करना पार्टी आलाकमान के लिए खीर साबित हो रहा है. कांग्रेस की बात करें तो आलाकमान को गहलोत-पायलट गुट की सियासी खींचतान का भी सामना करना पड़ रहा है. हालांकि, सचिन पायलट (sachin pilot) ने हाल में राज्यसभा की 3 सीट जीतने का दावा करते हुए एकजुटता का संकेत दिया है. वहीं दूसरी ओर टिकट देने से पहले कांग्रेस (rajasthan congress) ने कुछ दिनों पहले हुए उदयपुर चिंतन शिविर में 50 फीसदी सीटें युवाओं को देने का भी ऐलान किया था ऐसे में पार्टी के सामने युवा और बुजुर्ग चेहरों के बीच में पशोपेश की स्थिति बनी हुई है. चुनावों से पहले राजस्थान कांग्रेस बुजुर्ग और नई पीढ़ी के नेताओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है.

बता दें कि राजस्थान से राज्यसभा जाने वालों की लिस्ट लगातार लंबी होती जा रही है. वहीं दिल्ली से तय होने वाले नामों में जी- 23 के नेता गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा, राजस्थान प्रदेश प्रभारी अजय माकन, रणदीप सुरजेवाला और पूर्व प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे का नाम सामने आ रहा है.

जयपुर से दिल्ली तक मुलाकातों का दौर

राज्यसभा चुनाव से पहले नेता जयपुर से दिल्ली तक लगातार मुलाकात कर रहे हैं. राजस्थान के पूर्व मंत्री दुर्र मियां, अश्क अली टांक, पूर्व सांसद रघुवीर मीना, ताराचंद भगौरा और राष्ट्रीय सचिव जुबेर खान ने हाल में प्रदेश प्रभारी अजय माकन से मुलाकात की • जिसके बाद कई तरह की सियासी अटकलें लगाई जा रही है.

वहीं दूसरी ओर चर्चा है कि नागौर की पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा, संजय गुर्जर और दिनेश खोड़निया के नाम पर भी कांग्रेस चर्चा कर रही है. हालांकि यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष और डूंगरपुर विधायक गणेश घोघरा और प्रतापगढ़ विधायक रामलाल मीना ने दिनेश खोड़निया के नाम का खुलकर विरोध किया है. आदिवासी नेता लगातार किसी आदिवासी को राज्यसभा भेजने पर अड़े हुए हैं.

दिल्ली में दावपेंच दिखा रहे स्थानीय नेता

इधर सियासी गलियारों में चर्चा है कि सीएम अशोक गहलोत कांग्रेस के परंपरागत वोट बैंक को देखते हुए किसी मुस्लिम और आदिवासी नेता को राज्यसभा भेजने के मूड में है. हालांकि पार्टी फिलहाल नेताओं के नाम पर मंथन कर रही है. राजस्थान में कांग्रेस विधायकों की संख्याबल के हिसाब से 3 राज्यसभा सीटें जीत सकती है.

दूसरी ओर गहलोत और पायलट खेमा चाहता है कि दिल्ली से एक सीट पर नाम तय हो बाकी दो सीटों पर किसी स्थानीय नेता को ही भेजा जाए. हालांकि, अंतिम फैसला आलाकमान सोनिया गांधी को करना है. गौरतलब है कि राजस्थान की 4 राज्यसभा सीटों पर 10 जून को चुनाव होने हैं.

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