Saturday, October 1, 2022

कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हुए सुनील जाखड़, कहा- पंजाब में राष्ट्रवाद और एकता के लिए छोड़ी पार्टी

कांग्रेस के पूर्व पंजाब प्रमुख सुनील जाखड़ (Sunil Jakhar) गुरुवार को बीजेपी में शामिल हो गए. बता दें कि जाखड़ ने दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में बीजेपी प्रमुख जेपी नड्डा की मौजूदगी में पार्टी ज्वाइन की. नड्डा ने जाखड़ के बीजेपी में शामिल होने को खुशी की बात बताया, क्योंकि इतने विशाल राजनीतिक अनुभव वाला एक नेता पार्टी में शामिल हुआ है. कांग्रेस का ‘हाथ’ छोड़ने के बाद से ही सुनील जाखड़ दिल्ली में थे. जाखड़ के करीबी सूत्रों ने कहा कि उन्हें राज्यसभा भेजा जा सकता है.

इसके अलावा, उन्हें पंजाब में कुछ जिम्मेदारी दी जाएगी. वहीं ये बातें भी कही जा रही हैं कि जाखड़ कांग्रेस से असंतुष्ट चल रहे अन्य नेताओं को बीजेपी में ला सकते हैं. बीजेपी चीफ नड्डा ने कहा, ‘मैं सुनील जाखड़ का भारतीय जनता पार्टी में स्वागत करता हूं. वह एक अनुभवी नेता हैं, जिन्होंने अपने राजनीतिक जीवन के दौरान अपने लिए एक नाम बनाया.

मुझे विश्वास है कि वह पंजाब में पार्टी को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे.’ बीजेपी में शामिल होने के बाद सुनील जाखड़ ने कहा, ‘मेरे परिवार की तीन पीढ़ियों ने पिछले 50 सालों से कांग्रेस पार्टी की सेवा की है. आज मैंने मैं पंजाब में राष्ट्रवाद, एकता और भाईचारे के मुद्दों पर कांग्रेस के साथ 50 साल पुराना नाता तोड़ दिया है.’ जाखड़ ने हाल ही में संकेत दिया था कि वह पंजाब में प्रासंगिक बने रहना चाहते हैं. शनिवार को फेसबुक लाइव पर उन्होंने कहा था, ‘कांग्रेस को शुभकामनाएं और अलविदा.’

पार्टी विरोधियों गतिविधियों का लगा था आरोप

कांग्रेस ने पिछले महीने उन्हें कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए सभी पदों से हटा दिया था. जाखड़ ने पार्टी नेता तारिक अनवर की ओर से नोटिस दिए जाने पर नाखुशी जाहिर की थी. उन्होंने कहा कि तारिक अनवर वह व्यक्ति थे, जिन्होंनेन्हों कभी सोनिया गांधी को विदेशी कहा था. जाखड़ ने कहा था कि उन्हें पंजाब कांग्रेस प्रमुख के पद से हटाया गया था, क्योंकि उन्हें अमरिंदर सिंह का करीबी माना जाता था.

जाखड़ ने अपने खिलाफ लगे आरोपों को खारिज कर दिया था और कहा था कि उनके बयान को तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया. साथ ही
उनके बयानों के गलत मायने निकाले गए. सुनील जाखड़ ने कहा था उनके बयान के गलत मतलब निकाले गए. अगर उनकी टिप्पणियों से किसी को ठेस पहुंची तो उन्होंनेन्हों खेद भी जताया था.
अपने ‘दिल की बात’ फेसबुक लाइव के दौरान, जाखड़ ने कहा कि उदयपुर की बैठक एक औपचारिकता को पूरा करने के अलावा और कुछ नहीं थी और ‘चिंतन शिविर’ के बजाय ‘चिंता शिविर’ होना चाहिए था.

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