Monday, September 26, 2022

Bharatpur के वीरेंद्र को 18 साल बाद मिला शहीद का दर्जा, साल 2004 में आतंकियों से मुठभेड़ में हुए थे शहीद, BSF अधिकारियों ने घर आकर दिया सम्मान

भरतपुर जिले के रारह निवासी वीरेंद्र को 18 साल की शहादत के बाद शहीद के रूप में सम्मानित किया गया है। आज बीएसएफ के अधिकारी शहीद वीरेंद्र सिंह के घर पहुंचे और शहीद वीरेंद्र सिंह को श्रद्धांजलि दी। अब वीरेंद्र सिंह के परिवार को भी केंद्र और राज्य सरकार की ओर से दी जाने वाली सभी सुविधाएं दी जाएंगी। वीरेंद्र सिंह वर्ष 2004 में शहीद हो गए थे।

आतंकियों से मुठभेड़ में वीरेंद्र सिंह शहीद हो गए

रारह नगर निवासी वीरेंद्र सिंह 16 अगस्त 1994 को बीएसएफ में शामिल हुए थे। 2004 में वीरेंद्र सिंह जम्मू कश्मीर में 52वीं बटालियन में तैनात थे, जब पता चला कि अनंतनाग की एक मस्जिद में कुछ आतंकी छिपे हुए हैं। सूचना मिलते ही बीएसएफ ने तलाशी अभियान शुरू कर दिया। उस दौरान बीएसएफ और आतंकियों के बीच झड़प हुई थी। जिसमें वीरेंद्र सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

18 साल बाद शहीद का दर्जा

पहले बीएसएफ में शहीद हुए जवानों को शहीद का दर्जा नहीं दिया जाता था लेकिन अब अर्धसैनिक बल में शहीद हुए जवानों को शहीद का दर्जा दिया जाता है। नियम लागू होने के 18 साल बाद 178वीं बटालियन के डिप्टी कमांडर मनोज कुमार वीरेंद्र कुमार वीरेंद्र सिंह के घर पहुंचे और उन्हें शहीद घोषित कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि शहीद के परिवार को केंद्र और राज्य सरकार की सभी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। साथ ही यदि शहीद का परिवार 4 हजार वर्ग फुट में घर बनाता है तो मिस्टर सीमेंट की ओर से मुफ्त में सीमेंट उपलब्ध कराया जाएगा।

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