Saturday, October 1, 2022

M. Com. की पढ़ाई करेगा जौमेटो बॉय, बोला अपनो ने नहीं दिया साथ

अब M. Com. की पढ़ाई करेगा जौमेटो बॉय बोला – 34 साल में अपनों ने साथ नहीं दिया, अनजान लड़के ने मेरी लाइफ बदल दी-कस्टमर से बाइक मिलने वाले जौमेटो बॉय दुर्गाशंकर का जीवन काफी संघर्षों से भरा रहा है। पिता की मौत के बाद मां ने भी साथ छोड़ दिया था। रिश्तेदारों ने भी कुछ समय तक ही ख्याल रखा।

20 साल पहले पुश्तैनी मकान डूब गया। रुपए की तंगी के कारण दो वक्त की रोटी के लाले पड़ गए। सिर ढकने के लिए छत नहीं थी। दिनभर ऑर्डर डिलीवरी के बाद रात को रेस्टोरेंट में सोकर ही रात बिताते हैं। अब अनजान होते हुए आदित्य शर्मा से और देश भर के लोगों से मिले प्यार को वह भूल नहीं पा रहा है। उसका कहना है कि 34 साल की लाइफ में अपनों ने साथ नहीं दिया।

18 साल के लड़के ने बिना कहे उसका दर्द समझा और बाइक दिला दी। दुर्गा शंकर मीणा केकड़ी के पास सावर के एक छोटे से गांव पारलिया का रहने वाला है। उन्होंने बताया कि बचपन से ही जीवन संघर्ष में बीता है। छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी मन को मारना पड़ता था। आदित्य से उनका कोई नाता नहीं है। साइकिल से केवल कोल्ड ड्रिंक का ऑर्डर देने गया था।

घरवालों के प्यार को तरसा

मगर उसने अनजान होते हुए बिना कुछ कहे उनकी मदद की।घरवालों के प्यार को तरसा जौमेटो बॉय का कहना है कि आदित्य ने ट्विटर पर मदद के लिए मुहिम शुरू की थी। उससे कुछ घंटों में ही पूरा देश जुड़ गया। बचपन में माता-पिता, नाते-रिश्तेदारों का प्यार नहीं मिला। मगर अब पूरे देश के लोगों का प्यार मिला है। सपने में भी ऐसी कल्पना नहीं की थी।

M.COM और बच्चों को देंगे ऑनलाइन इंग्लिश ट्यूशन दुर्गाशंकर ने बताया कि देश से 1.90 लाख रुपए की मदद मिली। 90 हजार की बाइक लेने के बाद 50 हजार का पर्सनल लोन चुका दिया है। अब बचे हुए पैसे से वापस पढ़ाई जारी करने का मन है।

काम के साथ अब M.COM की पढ़ाई शुरू करेगा। टाइम मिलने पर बच्चों को ऑनलाइन इंग्लिश का ट्यूशन देना भी शुरू करने की इच्छा है।अजमेर के नवोदय स्कूल में पढ़ाई की जौमेटो बॉय ने बताया कि पिता की मौत के बाद अजमेर के नवोदय स्कूल में एडमिशन लिया। मगर कुछ समय बाद ही मां भी नाता विवाह कर उसे छोड़कर चली गई।

स्कूल वालों ने उसे हॉस्टल में रखा। 12th तक उसकी पढ़ाई, खाना और रहने का खर्चा उठाया। साल 2001 में स्कूल से पास आउट होने के बाद दोस्तों के साथ किराए के मकान में रहकर देवली कॉलेज से बीकॉम की पढ़ाई की।

इस दौरान बच्चों को कोचिंग देकर फीस, खाना-पीना और रहने का खर्चा उठाया। कॉलेज के बाद स्कूलों में पढ़ाना शुरू कर दिया था। शुरुआत में 1300 रुपए सैलरी मिलती थी। इसके बाद जोधपुर , गंगापुर, विजयनगर, रायला व भीलवाड़ा में 12वीं तक की स्कूलों में पढ़ाया । धीरे-धीरे सैलरी बढ़ी। मगर कोरोना में नौकरी जाने के बाद हालात बिगड़ गए। किराया और खाने-पीने में थोड़े बहुत जमा रुपए भी खर्च हो गया। इसके बाद जौमेटो में नौकरी शुरू की।

नहीं थी रहने की जगह

घर डूबने के बाद रहने को अपनी छत नहीं दुर्गाशंकर ने बताया कि 20 साल पहले बीसलपुर बांध का काम शुरू हुआ था। इस दौरान बांध के डूब क्षेत्र में उनका पुश्तैनी घर भी आ गया। मकान का मुआवजा मां को मिला। उस समय वह नवोदय में पढ़ाई करता था। आज उसके गांव में उसका कुछ भी नहीं है। 7 महीने से जौमेटो में नौकरी कर रहा है। एक ऑर्डर डिलीवरी करने पर 20 से 30 रुपए के हिसाब से पेमेंट मिलता है। महीने का दस हजार रुपए मिल जाता है। काम के बाद रेस्टोरेंट में जाकर सो जाता है

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